लखीमपुर खीरी: दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले से घायल गैंडे की मौत
पलिया कलां/लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। जैव विविधता के लिए समूचे विश्व में पहचान बने दुधवा टाइगर रिजर्व के सलूकापुर वन क्षेत्र में चलाई जा रही गैंडा परियोजना को उस समय एक और गहरा झटका लगा, जब गश्त पर निकली फारेस्ट गार्डों की टीम को कल बाघ द्वारा बुरी तरह घायल हुए गेंडे के बच्चे का …
पलिया कलां/लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। जैव विविधता के लिए समूचे विश्व में पहचान बने दुधवा टाइगर रिजर्व के सलूकापुर वन क्षेत्र में चलाई जा रही गैंडा परियोजना को उस समय एक और गहरा झटका लगा, जब गश्त पर निकली फारेस्ट गार्डों की टीम को कल बाघ द्वारा बुरी तरह घायल हुए गेंडे के बच्चे का शव दिखाई दिया। गार्डों ने तत्काल इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। जिनके आदेश पर चिकित्सकों की टीम ने उसके शव का पोस्टमार्टम किया।
पार्क सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नारायणी मादा गेंडे का डेढ़ वर्षीय पांचवी संतान जब गैंडों के लिए आरक्षित सोनारीपुर दक्षिण रेंज के सलूकापुर वन क्षेत्र की ककरहा बीट कक्ष संख्या 6 में कल टहल रहा था, इस दौरान किसी बाघ ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसकी सूचना सलूकापुर रेंज में तैनात फॉरेस्ट गार्डों ने रेंजर को दी और उन्होंने इस घटना से अपने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
इसके बाद उपनिदेशक दुधवा, उप प्रभागीय वन अधिकारी बेलरायां, क्षेत्रीय वन अधिकारी सोनारी पुर दक्षिण ने मौका मुआयना किया।दुधवा पार्क निदेशक संजय पाठक के निर्देश पर कानपुर से पहुंचे पशु चिकित्सक डॉ. आर के सिंह ने गैंडे के शिशु को बचाने की पूरी कोशिश की, किंतु आज पार्क अधिकारियों को उसकी मौत की सूचना मिली। इसके पश्चात उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे. बी. सिंह, डॉक्टर बीआर निगम, डा. दयाशंकर ने उसका पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम करने वाली पशु चिकित्सकों की टीम के अनुसार गेंडे की मौत किसी हिंसक परभक्षी वन्यजीव के हमले में 17 गंभीर घावों के पश्चात लगे शॉक से हुई है। इस घटना की पुष्टि करते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि कल किसी बाघ ने गैंडे के शिशु को घायल कर दिया था, काफी कोशिश के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका और आज उसकी मौत हो गई।
