बजट से उम्मीद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को तीसरी बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह उनके लिए सबसे मुश्किल बजट होगा, कोरोना महामारी से पटरी पर लौट रहे देश के लिए आम बजट पेश करेंगी। जनता की उम्मीदें आसमान छू रही हैं। कोरोना के आने से पहले देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी अच्छी थी। दुनिया …
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को तीसरी बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह उनके लिए सबसे मुश्किल बजट होगा, कोरोना महामारी से पटरी पर लौट रहे देश के लिए आम बजट पेश करेंगी। जनता की उम्मीदें आसमान छू रही हैं। कोरोना के आने से पहले देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी अच्छी थी।
दुनिया हमारी तरफ नजरें टिकाए बैठी थी, लेकिन महामारी ने हमें सबसे प्रभावित देशों की कतार में ला खड़ा किया यानि कोविड ने इसे पस्त कर दिया। अर्थव्यवस्था की सुस्ती के कारण राजस्व में भी गिरावट आई है। सरकार का घाटा तेजी से बढ़ रहा है। अंततः सरकार को अपने अनुत्पादक खर्चों को कम करना होगा।
वित्तमंत्री को आगामी बजट में तय करना है कि वे सरकार के घाटे की भरपाई कैसे करेंगी? हालांकि, अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटती दिखाई दे रही है, लेकिन इसे जारी रखना और निवेश तथा रोजगार का सृजन बड़ी चुनौती होगी। इस वर्ष कोविड संकट के चलते सरकार का वित्तीय घाटा देश के जीडीपी का 3.5 प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत हो जाने का अनुमान है।
बीते कई वर्षों से सरकार लगातार आयकर, जीएसटी और आयात कर की दरों में कटौती करती आ रही है। यह कटौती सार्थक होती यदि साथ-साथ अर्थव्यवस्था में मनमाफिक गति आती। आगामी बजट की मुख्य चुनौती रोजगार पैदा करने एवं जमीनी स्तर पर बाजार में मांग बनाने की है जो एक दुष्कर कार्य है। फिर भी इस कार्य को किया जा सकता है। यदि सरकार अपनी आय और खर्च की दिशा में बदलाव करे। लगातार ऋण लेकर अर्थव्यवस्था को नहीं संभाला जा सकता। सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।
पहला कदम सरकारी घाटे को कम करने का उठाना होगा। आगामी बजट में सरकार को आयकर में और कटौती नहीं करनी चाहिए। बल्कि आयकर में वृद्धि करनी चाहिए। इससे समृद्ध वर्ग पर टैक्स का बोझ जरूर बढ़ेगा लेकिन इनकी खपत में ज्यादा कटौती नहीं होगी। जीएसटी की दर में कटौती करनी चाहिए क्योंकि इससे आम आदमी को राहत मिलेगी और बाजार में मांग बढ़ेगी।
आयात कर में भी वृद्धि करनी चाहिए, जिससे कि आयातित माल देश में न आए और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले और वे फलफूल सकें ताकि देश के युवाओं के लिए अधिक रोजगार पैदा करके सकारात्मक रूप से सहयोग दे सकें। बजट में ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के उपायों के साथ-साथ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास के माध्यम से बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने वाले कामों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
