ओरल हाइजीन से नहीं होगा बीमारियों का खतरा, ऐसे रखें अपने दांतों को स्वस्थ

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बरेली, अमृत विचार। जिस तरह से आप अपने शरीर को स्वच्छ रखते हैं, ठीक वैसे ही अगर आप अपने मुंह को स्वच्छ नहीं रखेंगे तो दांतों और मसूड़ों से संबंधित कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। दांतों में सड़न, मसूड़ों मे सूजन, बैक्टीरियल संक्रमण, सांसों की बदबू आदि जैसी परेशानियां तो होंगी …

बरेली, अमृत विचार। जिस तरह से आप अपने शरीर को स्वच्छ रखते हैं, ठीक वैसे ही अगर आप अपने मुंह को स्वच्छ नहीं रखेंगे तो दांतों और मसूड़ों से संबंधित कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। दांतों में सड़न, मसूड़ों मे सूजन, बैक्टीरियल संक्रमण, सांसों की बदबू आदि जैसी परेशानियां तो होंगी ही, साथ ही इससे शरीर के दूसरे हिस्सों में भी समस्याएं हो सकती हैं।

एक शोध के मुताबिक, दांतों और मसूड़ों की समस्याएं हृदय रोग का कारण बन सकती हैं। अगर आप दैनिक हाइजीन के दौरान थोड़ा-सा समय और ध्यान अपने मुंह की सही तरीके से सफाई पर देंगे तो आप कई गंभीर बीमारियों से खुद को बचा पाएंगे।

आपको जानकर हैरानी होगी कि दांतों के स्वास्थ्य का सीधा संबंध हृदय रोग एवं मधुमेह से भी है। कई शोधों में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जो लोग अपने दांतों को गंदा रखते हैं या जिन्हें मसूड़ों से जुड़े रोग होते हैं उनमें हार्ट अटैक और हृदय संबंधी अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

हम सभी को दांतों से जुड़ी कोई न कोई समस्या होती ही रहती है लेकिन कम लोग ही छोटी-मोटी समस्या के लिए दंत रोग विशेषज्ञ के पास जाते हैं। इस अनदेखी के कारण ही कई बार छोटी-छोटी बीमारियां भी गंभीर हो जाती हैं। अगर आप दांतों की सही देखभाल करें और हर छह महीने में अपने दांतों का नियमित चेकअप करवायें तो समस्याओं को समय रहते रोका जा सकता है।

क्यों लगता है ठंडा-गरम?
दांत टूटने, नींद में दांत किटकिटाने, दांतों के घिसने के बाद, दांतों की नसें खुलने के कारण ठंडा-गरम लगने लगता है। साथ ही ब्रश करते समय दांतों पर ज्यादा जोर डालने से भी दांत घिस जाते हैं और बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।

बचाव के लिए क्या करें?
– ब्रश करते समय दांतों पर ज्यादा दबाव न डालें
– दांतों को पीसने से बचें।

क्या है उपचार?
इस समस्या का उपचार इस बात पर तय होता है कि आखिर आपको दांतों में ठंडा-गरम लगने के पीछे कारण क्या है। फिर भी डॉक्टर खास टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। आप डॉक्टरी सलाह के बिना भी बाजार में मिलने वाले सें‍सेटिव टूथपेस्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, अगर दो से तीन महीने पेस्ट करने के बाद भी आराम न मिले तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सांस में बदबू
मसूड़ों और दांतों की अगर सही प्रकार से सफाई न की जाए तो उनमें सड़न और बीमारी के कारण सांसों में बदबू हो सकती है। कई बार पेट खराब या मुंह की लार का गाढ़ा होना भी इसकी वजह होती है। प्याज और लहसुन आदि खाने से भी मुंह से बदबू आने लगती है।

इलाज: दांतों एवं मसूड़ों मे जमा गंदगी की सफाई करवाकर ही इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। साथ ही माउथवॉश के प्रयोग से भी आराम मिल सकता है।

पायरिया
मुंह से बदबू आने लगे, मसूड़ों में सूजन और खून निकलने लगे और चबाते हुए दर्द होने लगे तो पायरिया हो सकता है। पायरिया होने पर दांत के पीछे सफेद-पीले रंग की परत बन जाती है। कई बार हड्डी गल जाती है और दांत हिलने लगता है। पायरिया की मूल वजह दांतों की ढंग से सफाई न करना है।

इलाज: पायरिया का सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों तरह से इलाज होता है। शुरू में इलाज कराने से सर्जरी की नौबत नहीं आती। क्लीनिंग, डीप क्लीनिंग (मसूड़ों के नीचे) और फ्लैप सर्जरी से पायरिया का ट्रीटमेंट होता है। मरीज के रक्त (स्टेम सेल थेरेपी) से ही नयी हड्डी बनाने वाले पदार्थ बनाने जैसी नवीनतम तकनीकों से भी इलाज किया जाता है।

ब्रश करने का सही तरीका
यूं तो हर बार खाने के बाद ब्रश करना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। ऐसे में दिन में कम से कम दो बार ब्रश जरूर करें और हर बार खाने के बाद कुल्ला करें। दांतों को तीन-चार मिनट तक ब्रश करना चाहिए। कई लोग दांतों को बर्तन की तरह मांजते हैं जो गलत है। इससे दांत घिस जाते हैं। आमतौर पर लोग जिस तरह दांत साफ करते हैं उससे 60-70 फीसदी ही सफाई हो पाती है। दांतों को हमेशा सॉफ्ट ब्रश से हल्के दबाव से धीरे-धीरे साफ करें। मुंह में एक तरफ से ब्रशिंग शुरू कर दूसरी तरफ जाएं। बारी-बारी से हर दांत को साफ करें। ऊपर के दांतों को नीचे की ओर और नीचे के दांतों को ऊपर की ओर ब्रश करें। दांतों के बीच में फंसे कणों को फ्लॉस (प्लास्टिक का धागा) से निकालें। इसमें 7-8 मिनट लगते हैं और यह अपने देश में ज्यादा कॉमन नहीं है। अंगुली या ब्रश से धीरे-धीरे मसूड़ों की मालिश करने से वे मजबूत होते हैं।

जीभ की सफाई जरूरी
जीभ को टंग क्लीनर और ब्रश, दोनों से साफ किया जा सकता है। टंग क्लीनर का इस्तेमाल इस तरह करें कि खून न निकले।

कैसा ब्रश सही: ब्रश सॉफ्ट और आगे से पतला होना चाहिए। करीब दो-तीन महीने या फिर जब ब्रसल्स फैल जाएं तो ब्रश बदल देना चाहिए।

टूथपेस्ट की भूमिका
यह एक मीडियम है जो लुब्रिकेशन, फॉमिंग और फ्रेशनिंग का काम करता है। असली एक्शन ब्रश करता है लेकिन फिर भी अगर टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें तो उसमें फ्लोराइड होना चाहिए। यह दांतों में कीड़ा लगने से बचाता है। पिपरमिंट वगैरह से ताजगी का अहसास होता है। टूथपेस्ट मटर के दाने जितना लेना काफी होता है।

स्केलिंग और पॉलिशिंग
दांतों पर जमा गंदगी को साफ करने के लिए स्केलिंग और फिर पॉलिशिंग की जाती है। यह हाथ और मशीन दोनों तरीकों से की जाती है। चाय- कॉफी, पान और तंबाकू आदि खाने से बदरंग हुए दांतों को सफेद करने के लिए ब्लीचिंग की जाती है। दांतों की सफेदी करीब डेढ़-दो साल टिकती है। उसके बाद दोबारा ब्लीचिंग की जरूरत पड़ सकती है।

“अगर कोई परेशानी नहीं है तो कैविटी के लिए अलग से चेकअप कराने की जरूरत नहीं है लेकिन हर छह महीने में एक बार दांतों की पूरी जांच करानी चाहिए। इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस के पेरीओडॉनटिक्स विभाग में पायरिया एवं मसूड़ों से संबंधित समस्त बीमारियों का इलाज आधुनिक उपकरण एवं तकनीक (लेजर सर्जरी, अल्ट्रासॉनिक पीजो सर्जरी, डेंटल इमप्लांट्स, मसूड़ो की प्लास्टिक सर्जरी, पीआरएफ सर्जरी) द्वारा किया जाता है।” -डा. शिवा मंजुनाथ, विभागाध्यक्ष, पेरियोडोंटिक्स

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