उम्मीदों का बजट
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आम बजट सोमवार को पेश किया। कोरोना महामारी की वजह से इस बार बजट पेपरलेस हो चुका है। वित्त मंत्री ने एक टैब के जरिए अपना तीसरा बजट पेश किया। कोरोना संकट के बीच पेश किए गए इस बजट में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति के …
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आम बजट सोमवार को पेश किया। कोरोना महामारी की वजह से इस बार बजट पेपरलेस हो चुका है। वित्त मंत्री ने एक टैब के जरिए अपना तीसरा बजट पेश किया। कोरोना संकट के बीच पेश किए गए इस बजट में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ-साथ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के लिए भी कारगर प्रयास किए गए हैं।
बजट गरीब और किसानों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। हालांकि इसमें मध्यम वर्ग के लिए राहत नहीं है और न गृहणियों का ध्यान रखा गया है। बजट ऐसे समय में पेश हुआ है, जब कोरोना वायरस महामारी के चलते अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।
सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बजट में कई बड़े एलान किए हैं। संसाधन और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा ग्रामीण सेक्टर को लेकर भी घोषणाएं की गई हैं। मांग बढ़ाने से लेकर रोजगार पैदा करने के उपाय बजट में दिख रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों को राहत देने की कोशिश गई है, जिन पर कोरोना वायरस महामारी का ज्यादा प्रभाव पड़ा है।
आयकर दाताओं के लिए बजट में किसी राहत की घोषणा नहीं की गई है। इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का ध्यान स्वास्थ्य, संसाधन और सुधार के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर रहा है। कोई नया कर न लगाकर उद्योग को राहत देने की पहल की गई है।
हालांकि कुछ कह सकते हैं कि बजट से देश में निजीकरण की राह तेज होगी। सरकार ने राजकोषीय घाटे की परवाह न करते हुए सरकारी खर्च बढ़ाने का एलान किया है। साफ है कि देश में सरकार कारोबार को आसान बनाना चाहती है।
बजट में सभी सेक्टरों को ध्यान में रखा गया है, आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए देश को संपूर्ण विकास की ओर अग्रसर करने वाले बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने के साथ कृषि और गांव-गरीब के लिए काफी कदम उठाए गए हैं।
आत्मनिर्भर भारत पर 17 फीसदी बजट का प्राविधान किया गया है। वित्त मंत्री ने पारदर्शी, प्रभावी और देश में निवेश केंद्रित कर प्रणाली पर जोर दिया है। टैक्स रेट, सरचार्ज और सेस को जस का तस रखा गया है। सबसे अधिक जिस कोविड सेस पर बहस थी, सरकार ने ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया है। यह सकारात्मक कदम है।
