सवाल एंटीबॉडी का
कोरोना से लड़ाई के बीच यह राहत देने वाली खबर है कि लोगों में एंटीबॉडी विकसित हुई है। दरअसल, दिल्ली में किए गए ताजा सीरो सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 56.13 फीसदी लोगों में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) पाई गई है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को पांचवें सीरो सर्वेक्षण के नतीजों की घोषणा …
कोरोना से लड़ाई के बीच यह राहत देने वाली खबर है कि लोगों में एंटीबॉडी विकसित हुई है। दरअसल, दिल्ली में किए गए ताजा सीरो सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 56.13 फीसदी लोगों में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) पाई गई है।
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को पांचवें सीरो सर्वेक्षण के नतीजों की घोषणा की तो इसका खुलासा हुआ। यह सीरो सर्वे 15 से 23 जनवरी के बीच किया गया। दिल्ली में हर वार्ड से नमूने एकत्र किए गए। कुल 28,000 नमूने एकत्र किए गए थे। यह सर्वे भले ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र के नागरिकों में एंटीबॉडी विकसित होने का स्पष्ट संकेत दे रहा है लेकिन इसके आधार पर यह माना जा रहा है कि देश के दूसरे स्थानों पर भी रहने वाले नागरिकों के मामले में ऐसा हुआ होगा। इसको कोरोना संक्रमण के कम होते मामलों से भी जोड़ा जा रहा है।
यही वजह है कि इस सर्वे पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली कोविड-19 के खिलाफ सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता की ओर बढ़ रही है। प्रतिरक्षा विज्ञानी भी सीरो सर्वे के नतीजों को रोग के प्रसार की दर का आंकलन करने में मददगार मान रहे हैं, हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने सीरो सर्वे को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में पूरी तरह से सावधानी बरतने की सलाह दी है।
हालांकि वे यह मानते हैं कि इन नतीजों से यह जाहिर होता है कि सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता कोविड-19 के प्रसार की बीच की कड़ी को तोड़ सकती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता उस वक्त पैदा होती है जब लोगों के एक बड़े समूह में संक्रमण से उबरने के बाद संक्रामक रोग के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाती है, जिसके चलते आबादी में इसका फैलना रुक जाता है।
अमेरिका में सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स ऐंड पॉलिसी के निदेशक एवं प्रतिरक्षा विज्ञानी रामनन लक्ष्मीनारायण ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से 60-70 प्रतिशत आबादी में प्रतिरोधक क्षमता पाये जाने को अच्छा माना जाता है।
बहरहाल, सीरो सर्वे के नतीजों के बाद हम यह सोचकर असावधान नहीं हो सकते कि कोरोना से अब कोई खतरा नहीं रह गया है। हमें यह समझ लेना होगा कि अभी खतरा टला नहीं है। हमारे देश में कोरोना की दो वैक्सीन बनने के बाद भी सरकार और विशेषज्ञों की ओर से यही कहा गया कि हमें संक्रमण को लेकर सावधानी लगातार बरतनी है। पहले की तरह ही मास्क पहनने के साथ ही और दो गज की दूरी का नियम बनाए रखना है।
