भारत की चिंता
म्यांमार में सत्ता सेना के अपने हाथों में लेने के बाद दुनिया भर में इस राजनीतिक घटनाक्रम की कड़ी आलोचना हो रही है। म्यामांर में लोकतंत्र के लिए लंबी लड़ाई आंग सान सू ची ने लड़ी। जीवन के दो दशक उन्होंने नजरबंदी में गुजारे। अंत में देश में लोकतंत्र स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर …
म्यांमार में सत्ता सेना के अपने हाथों में लेने के बाद दुनिया भर में इस राजनीतिक घटनाक्रम की कड़ी आलोचना हो रही है। म्यामांर में लोकतंत्र के लिए लंबी लड़ाई आंग सान सू ची ने लड़ी। जीवन के दो दशक उन्होंने नजरबंदी में गुजारे। अंत में देश में लोकतंत्र स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ही ली। लेकिन अब वहां चुनावों में गड़बड़ी और कोरोना के नाम पर सैन्य तानाशाही कायम हो गई है।
शासन की कमान एक साल के लिए उपराष्ट्रपति मींट स्वे के हाथ में सेना ने दी है। स्वे पहले सैन्य अधिकारी रह चुके हैं। अमेरिका समेत कई देश इस घटना के बाद म्यांमार पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर रहे हैं। लोकतांत्रिक नेताओं को रिहा करने की आवाजें उठ रही हैं। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन चिंतित हैं कि अब अल्पसंख्यकों, राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों पर दमनात्मक कार्रवाई होगी। म्यांमार का घटनाक्रम भारत के लिए भी चिंता का सबब है।
म्यांमार में हुए घटनाक्रम का भारत पर असर पड़ना तय है। भारत की म्यांमार के साथ 1600 किलोमीटर लंबी सीमा है। म्यांमार के साथ भारत की समुद्री सीमा भी लगती है। भारत म्यांमार की सेना को स्वदेशी पनडुब्बियों समेत कई रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करता है। भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने पिछले साल अक्टूबर माह में ही म्यांमार का दौरा किया था।
इस दौरे में कोविड-19, वैक्सीन की आपूर्ति और तकनीक समेत कई विषयों पर बातचीत हुई थी। श्रृंगला ने एक बयान में कहा था कि म्यांमार भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि ये भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘ऐक्ट ईस्ट’ पालिसी दोनों का केंद्रबिंदु है।
म्यांमार और चीन की नजदीकियां, भारत के लिए चिंतनीय साबित होंगी।
अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में भारत-चीन आमने-सामने हैं, उत्तरपूर्व में कई उग्रवादी गतिविधियों को म्यांमार की सीमा से सटे इलाकों से चलाया जाता है। इन सब पर दो लोकतांत्रिक देश आपसी समझदारी से चर्चा कर सकते थे, लेकिन अब सैन्य शासन के बाद भारत की आवाज को कितना महत्व दिया जाएगा, ये देखना होगा।
म्यांमार में तो खुलकर लोकतंत्र का दमन हुआ है। क्या म्यांमार में हुए तख्तापलट के पीछे चीनी साजिश हो सकती है? वैसे भी म्यांमार की शासक आंग सान सू की भारत से दोस्ती चीन की आंखों की किरकिरी बनी हुई थी। चीन ने हाल ही में म्यांमार में अरबों डॉलर का निवेश किया है, फिर भी वह सत्ता पलट कार्रवाई पर चुप्पी साधे हुए है। इसका राज सबको समझ में आ रहा है। ऐसे में, भारत को इस पर अपना स्टैंड तत्काल लेना चाहिए।
