बरेली: कागजों में प्रतिबंध, सड़कों पर घूम रहे पशु
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम के शहरी क्षेत्र में पशुओं के सड़कों पर घूमने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पहले दिन ही हवा-हवाई साबित हुआ। शुक्रवार को ‘अमृत विचार’ की टीम ने नगर निगम के आदेश पर हो रहे अमल की पड़ताल की। इस दौरान रोज की तरह ही सड़कों पर पशु घूमते मिले। डेलापीर …
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम के शहरी क्षेत्र में पशुओं के सड़कों पर घूमने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पहले दिन ही हवा-हवाई साबित हुआ। शुक्रवार को ‘अमृत विचार’ की टीम ने नगर निगम के आदेश पर हो रहे अमल की पड़ताल की। इस दौरान रोज की तरह ही सड़कों पर पशु घूमते मिले।
डेलापीर तालाब के पास, मेयर आवास, बरेली कॉलेज रोड आदि क्षेत्रों में पशु सड़कों पर मिले। नगर निगम की टीम कहीं भी पशुओं को पकड़ते दिखाई नहीं दी। सड़कों पर घूमने से पशु वाहनों की रफ्तार को रोकते मिले। कई स्थानों पर कुत्ते झुंड में दिखाई दिए। यहां तक कि डेयरियों के स्थापित होने पर लगाए प्रतिबंध पर भी अमल होता नहीं दिखा।
डेयरियों का गोबर नालियों में पहुंचता है और नालियां चोक हो रही हैं लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार कागजों में ही आदेश लागू करा कर खानापूर्ति करते हैं। शहरी क्षेत्र में नगर निगम ने डेयरियों के स्थापित होने समेत कुछ पशुओं के सड़क पर घूमने पर प्रतिबंध लगाया है। मामले को लेकर निगम ने 11 जनवरी तक लोगों से आपत्ति मांगी थी लेकिन किसी ने कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। अब देखना है कि नगर निगम की कार्रवाई धरातल पर उतरती है या नहीं।
दूसरी तरफ सड़कों पर कुत्ते, सूकर, गधे, घोड़े, खच्चर, सांड और भैंस आदि ट्रैफिक व्यवस्था के संचालन में बाधक बन रहे हैं। शहर का शायद ही कोई मुख्य मार्ग हो जहां जानवरों का झुंड न मिले। इनके कारण आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। रामपुर गार्डन, कालीबाड़ी, कटरा चांद खां, गंगापुर आदि मुख्य जगहों पर काफी सालों से डेयरियां स्थापित हैं लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार हटा नहीं पाए।
दोहरी नीति के बीच फंसीं डेयरियां, संचालकों पर होगी रिपोर्ट
वर्षों से शहर की घनी आबादी के बीच स्थापित करीब 600 से अधिक डेयरियों को हटाने के लिए नगर निगम कई बार तैयारी कर चुका है। हर बार आदेश हुए पर कागजों से बाहर नहीं निकले। एक भी डेयरी शहर से नहीं हटी। अब डेयरियों को लेकर नगर निगम की रणनीति एक नहीं है।
नगर निगम कभी डेयरियों को शहर से बाहर स्थापित कराने की बात कहता है तो कभी डेयरियों से कामर्शियल टैक्स वसूलने की। दोहरी नीति के बीच निगम का डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किसी के गले नहीं उतर रहा है। अफसरों की दोहरी नीति के कारण डेयरियां शहर से बाहर स्थापित नहीं हो पा रही हैं। करीब दो माह पहले निगम के कर विभाग ने आदेश जारी किया था कि शहर में डेयरियों से कामर्शियल टैक्स वसूला जाएगा।
कर विभाग की टीम करीब 100 डेयरियों तक पहुंची। डेयरियों के संचालकों पर कामर्शियल टैक्स लगाया। अब सवाल यह खड़ा होता है कि निगम की मंशा क्या है, अपना खजाना भरना या डेयरियों को शहर के बाहर करना? इन दोनों आदेशों में तालमेल का अभाव होने के कारण शहरी विकास मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम के जिम्मेदार अमल नहीं करा पा रहे हैं। इधर, नगर निगम के जिम्मेदार यह भी कह रहे हैं कि जिन संचालकों को नोटिस भेजे गए हैं यदि उन्होंने डेयरियां शहर से बाहर स्थापित नहीं कीं तो उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
शहर में सड़क पर पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कुछ पशुओं को शहर में प्रतिबंधित घोषित किया गया है। डेयरियों पर व्यावसायिक टैक्स लगाया गया है लेकिन उन्हें हटाने की भी पूरी तैयारी कर ली गई है। इसके लिए संचालकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। डेयरी न हटाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त
