लोकतंत्र सूचकांक

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Edited By Amrit Vichar
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लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक रैंकिंग में भारत लगातार पिछड़ रहा है। द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के मुताबिक, लोकतांत्रिक मूल्यों से पीछे हटने और नागरिकों की स्वतंत्रता पर कार्रवाई के कारण देश दो स्थान फिसलकर 53 वें स्थान पर आ गया है। वर्ष 2014 से डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 26 स्थान नीचे खिसका है। भारत दुनिया …

लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक रैंकिंग में भारत लगातार पिछड़ रहा है। द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के मुताबिक, लोकतांत्रिक मूल्यों से पीछे हटने और नागरिकों की स्वतंत्रता पर कार्रवाई के कारण देश दो स्थान फिसलकर 53 वें स्थान पर आ गया है। वर्ष 2014 से डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 26 स्थान नीचे खिसका है।

भारत दुनिया के उन 52 देशों में शुमार है जहां इस सूचकांक के हिसाब से त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र है। हालांकि भारत इस सूची में अपने अधिकतर पड़ोसी देशों से ऊपर है। भारत को 2019 में 6.9 अंक मिले थे जो घटकर 6.61 अंक रह गए हैं और यह विश्वभर के 167 देशों में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति की झलक दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी से प्राधिकारियों के निपटने के तरीके के कारण 2020 में नागरिक अधिकारों का और दमन हुआ।

देश 2019 लोकतंत्र सूचकांक में 51वें स्थान पर रहा था। अगर यह गिरावट पहली बार दिखलाई गई होती तो उम्मीद बचती कि शायद इसमें अगले साल कोई सुधार होगा। वर्ष 2020 आंदोलन की भेंट चढ़ गया और रही-सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी, जिसमें लॉकडाउन की सख्ती के नाम पर नागरिक अधिकारों को हाशिए पर धकेला गया।

दो गज की दूरी का नियम लोगों को एकजुट होने से रोकता रहा, जबकि उसी दौरान राजनीतिक रैलियां और सभाएं पूर्ववत चलती रहीं। राजधानी दिल्ली में दो माह से जम्मू-कश्मीर जैसे हालात बन गए हैं, जहां लंबे समय तक इंटरनेट बाधित व मीडिया पर शिकंजा जैसे कार्यों से लोकतंत्र बाधित किया जाता रहा।

लोकतंत्र अपने नागरिकों को अपनी बात मनवाने के लिए प्रदर्शन का अधिकार देता है। किसान दो माह से तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं जो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। अब सरकार एक ओर किसानों से वार्ता की बात करती है, दूसरी ओर उनके दमन के लिए अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर रही है।

बैरिकेडिंग, कील ठुकवाना, सड़क खुदवाना, सीमाओं पर दुश्मन को रोकने के लिए काम आने वाली कंटीली बाड़ लगवाने जैसे काम लोकतांत्रिक तो नहीं कहे जा सकते। जब इस तरह के कदमों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई तो विदेश मंत्रालय को भी सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा। क्या केवल हम सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं कि रट लगाए रखने से हालात बदल सकते हैं। शायद नहीं। इसके लिए उन कमियों को दूर करना होगा, जिनकी वजह से हमारे लोकतंत्र को त्रुटिपूर्ण बताया जा रहा है।