बरेली: सफाई का जिम्मा, वाहन दौड़ा रहे सफाई कर्मी

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अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी का सपना संजोए शहर में सफाई कर्मचारियों की तैनाती में जमकर मनमानी की गई है। जिन्हें हाथों में झाड़ू लेकर शहर को चमकना चाहिए वे साहबों की मेहरबानी से बिना लाइसेंस के वाहन दौड़ा रहे हैं। उनसे मूल पद का कार्य न लेकर वाहन चालक का दायित्व दे दिया गया …

अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी का सपना संजोए शहर में सफाई कर्मचारियों की तैनाती में जमकर मनमानी की गई है। जिन्हें हाथों में झाड़ू लेकर शहर को चमकना चाहिए वे साहबों की मेहरबानी से बिना लाइसेंस के वाहन दौड़ा रहे हैं। उनसे मूल पद का कार्य न लेकर वाहन चालक का दायित्व दे दिया गया है। इसके कारण सफाई कर्मचारियों की कमी से नगर निगम जूझ रहा है। मनमानी तैनाती के पीछे का खेल बड़ा है।

शहर की जनसंख्या के हिसाब से स्मार्ट सिटी में सफाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए करीब 800 सफाई कर्मचारियों की कमी है। इसके चलते सफाई व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। नगर निगम के 80 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए स्थाई और संविदा के सफाई कर्मचारियों की संख्या 1900 है।

इसमें चौंकाने वाली बात यह हैं कि जिन सफाई कर्मचारियों के कंधे पर शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी है उनमें से 120 को कूड़ा गाड़ियों को चलाने के लिए चालक के रूप में तैनात कर दिया गया है जबकि 100 को सफाई नायक बनाया गया है। कुल सफाई कर्मचारियों में 600 के करीब संविदा के सफाई कर्मचारी है।

सूत्रों की मानें तो सफाई कर्मचारियों की तैनाती का नियम काफी पुराना है जबकि जनसंख्या में दस गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। साथ ही वार्ड की संख्या में इजाफा हुआ है। पहले जब पद सृजित हुआ था तो पास के गांवों को नगर निगम में शामिल नहीं किया गया था। अब निगम का क्षेत्र भी बढ़ गया है लेकिन सफाई कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ी है।

इसके कारण शहर की सफाई व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। अब सवाल यह उठता है कि शहर को स्वच्छ रखने का दावा करने वाले अफसर कमी होने के बाद भी सफाई कर्मचारियों से मूल पद का कार्य क्यों नहीं ले रहे हैं। कई ऐसे वार्ड हैं कि जिनकी आबादी 30 हजार तक पहुंच चुकी है लेकिन सफाई कर्मचारी महज पांच हैं। इन सभी के पीछे बड़ी वजह है कि पहुंच वाले सफाई कर्मचारी मनमर्जी से तैनाती करा लेते हैं।

सफाई कर्मचारियों की कमी है। संविदा कर्मचारियों से इसकी पूर्ति करने का प्रयास किया जा रहा है। मानकों के हिसाब से कर्मचारी नहीं हैं। आबादी काफी बढ़ चुकी है। इसके लिए शासन को भी पत्र भेजा गया है। -डा. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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