बरेली: शहर की सड़कें खोदने की जुलाई तक खुली छूट

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। भूमिगत ट्रंक सीवर लाइन बिछाने के बाद लोगों को ही सहूलियत मिलेगी लेकिन सीवर लाइन बिछाने के लिए जिस तरह से सड़कों को खोदकर छोड़ा जा रहा है उससे आमजन दिक्कत में हैं। जिम्मेदारों ने गाजियाबाद की कार्यदायी संस्था को जुलाई तक सड़कों को खोदने की खुली छूट दे रखी है। छूट …

अमृत विचार, बरेली। भूमिगत ट्रंक सीवर लाइन बिछाने के बाद लोगों को ही सहूलियत मिलेगी लेकिन सीवर लाइन बिछाने के लिए जिस तरह से सड़कों को खोदकर छोड़ा जा रहा है उससे आमजन दिक्कत में हैं। जिम्मेदारों ने गाजियाबाद की कार्यदायी संस्था को जुलाई तक सड़कों को खोदने की खुली छूट दे रखी है।

छूट देने के साथ यह भी निर्देश दिए हैं कि जुलाई तक हर हाल में सीवर लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण कर लें लेकिन संस्था ने जिम्मेदारों के उसी निर्देश को ढाल बना लिया और बेतरतीब ढंग से सड़कों को खोदती जा रही है। नगर आयुक्त कार्रवाई की बात कहते जरूर हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।

सीवर लाइन बिछाने के लिए आमजन को दिक्कतों में डालकर कार्यदायी संस्था अपने इशारे पर अधिकारियों को चला रही है। सिस्टम से कार्य किया जाए तो सड़कों पर खुदाई भी चलेगी और यातायात की दिक्कत भी नहीं रहेगी। जल निगम, नगर निगम और यातायात पुलिस के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है।

इधर, जिलाधिकारी नितीश कुमार कहते हैं कि कार्यदायी संस्था को जुलाई तक कार्य खत्म करने के निर्देश दिए हैं लेकिन यह भी कहा गया है कि जुलाई के बाद कार्य किया तो सख्त कार्रवाई होगी। कार्रवाई की बात जुलाई के बाद होगी लेकिन इससे पहले जनता के दर्द को कोई समझ नहीं रहा है। सीवर लाइन बिछाने की मौजूदा कार्यप्रणाली देखकर लग रहा है कि सीवर लाइन बिछाने का कार्य सालभर चलेगा। लोगों को और ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।

खुदाई से मरीजों के लिए ज्यादा दिक्कतें
गांधी उद्यान से चौकी चौराहे तक कई निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। चौकी चौराहे से एक साइड की सड़क पूर्ण रूप से खुदी पड़ी है। दूसरी साइड में ट्रैफिक का दिनभर इतना दबाव रहता है कि वाहन रेंग-रेंग कर चलते हैं। खुदी सड़क की साइड में निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंट सेंटर जाने वाले मरीजों को बड़ी दिक्कतें हो रही हैं। इमरजेंसी में काफी देर तक मरीज ज्यादा दिक्कतों से जूझ रहे हैं। अस्पताल संचालक भी परेशान हैं। मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त व जनप्रतिनिधियों से डाक्टरों ने कई बार शिकायतें कीं। एक माह से ज्यादा समय से दिक्कतें बरकरार हैं।

विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को नहीं आमजन की दिक्कतों से सरोकार
शहर की सभी सड़कें खुदी पड़ी हैं। कोई ऊबड़-खाबड़ है तो किसी पर नुकीले पत्थर बिछे हैं। यातायात व्यवस्था के भी हाल खराब हैं। कई अन्य तरह से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं लेकिन विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी आमजन की दिक्कतें नहीं दिख रही हैं। कांग्रेस, सपा और बसपा के प्रतिनिधियों ने आमजन की आवाज उठाना छोड़ दिया। किसी पार्टी ने बेतरतीब ढंग से हो रही खुदाई के खिलाफ आवाज नहीं उठाई जबकि अपने भाषणों में दावे सभी करते हैं कि लोगों को दिक्कतें नहीं होने देंगे। वहीं, शहर के व्यापारी कुतुबखाना पुल का विरोध कर रहे हैं लेकिन सड़कों की खुदाई से कारोबार प्रभावित होने को लेकर कोई आवाज नहीं उठा रहा है।

इन सड़कों पर सबसे ज्यादा फजीहत
बियावानी कोठी से रास्ता बंद होने से लोगों को कैंट के ऊबड़-खाबड़ वाले रास्ते से गुजरना पड़ रहा। दिनभर जाम रहता है। गांधी उद्यान से चौकी चौराहे तक, चौपुला चौराहे से पटेल चौक, पटेल चौक से बरेली कॉलेज गेट और यहां से श्यामगंज चौकी तक अनगिनत दुश्वारियां हैं। श्यामगंज पुल के नीचे अव्यवस्था ऐसी फैली है कि दिनभर कारोबारी, राहगीर धूल फांकते हैं। श्यामगंज से शाहजहांपुर रोड पर ईसाइयों की पुलिया तक सड़क एक तरफ से खुदी पड़ी है। चौपुला चौराहे से बिहारीपुर रोड पर, सुभाषनगर थाना वाला रोड के चौराहा, सेठ दामोदर पार्क और स्टेडियम रोड पर जगह-जगह सड़क खुदी पड़ी है।

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