सोशल मीडिया

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Edited By Amrit Vichar
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सोशल मीडिया पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार संवैधािनक ढांचा तैयार कर रही है। इसके तहत संसद के आगामी सत्र में इंटरनेट से जुड़े कुछ नियम-कायदे बनाने के लिए डाटा सुरक्षा विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक में सोशल मीडिया के प्रयोग के लिए ऐसी आचार-संहिता तैयार की जाएगी, जिससे आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट …

सोशल मीडिया पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार संवैधािनक ढांचा तैयार कर रही है। इसके तहत संसद के आगामी सत्र में इंटरनेट से जुड़े कुछ नियम-कायदे बनाने के लिए डाटा सुरक्षा विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक में सोशल मीडिया के प्रयोग के लिए ऐसी आचार-संहिता तैयार की जाएगी, जिससे आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट डालने पर लगाम लग सके।

नि:स्संदेह सरकार की ओर से सोशल मीडिया को लेकर नियम और गाइड लाइन बनाने का काम करना उचित कदम है, इसलिए क्योंकि विगत वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट और उनसे फैली अफवाहों से शांति भंग की स्थिति बनी है।

आज हर हाथ में मोबाइल है और अधिकांश लोग सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखते हैं। सोशल मीडिया सूचना तंत्र का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है, जहां कोई भी खबर कभी भी बिना पुष्टि के वायरल की जा रही है। ऐसे में बहुत सारे खुराफाती तत्व शांति भंग करने के मंसूबों के लिए ऐसे पोस्ट वायरल करते हैं जिनसे विवाद की स्थिति बन बनती है। धर्म-संप्रदाय के नाम पर फेसबुक और व्हाट्सएप पर सामग्री डाली जाती है। यह स्थिति कानून व्यवस्था के लिए चुनौती देती है। ऐसे में, लंबे समय से सोशल मीडिया के लिए आचार संहिता की जरूरत महसूस की जा रही थी ताकि उसका दुरुपयोग रुक सके।

अलबत्ता, इस आचार संहिता का दूसरा पहलू भी है। सोशल मीडिया आज लोगों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बड़ा मंच बनकर उभरा है। बहुत सारे लोग इस पर अपनी बात कहते हैं। ऐसे में, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सोशल मीिडया के लिए नियम-कायदे बनाने से कहीं संविधान में हािसल हर व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार न खत्म होने पाए। आचार संहिता पर सवाल उठाने वाले यह भी कह सकते हैं कि सोशल मीडिया पर शिकंजा कसकर सरकार लोकतंत्र में अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों पर रोक लगाने का कानून भी बना सकती है।

ऐसे मामले हाल में ही सामने आए हैं, जिनमें कुछ टवीट किए जाने के मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई है। बहरहाल, सोशल मीडिया के लिए सरकार कानून जरूर बनाए लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में अपनी बात कहने का सबको अधिकार बना रहना चाहिए, हां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में जो लोग आपत्तिजनक अथवा शांति व्यवस्था को भंग करने वाली सामग्री पोस्ट करें तो उन पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।