हल्द्वानी: ‘संजीवनी’ के इंतजार में जीवन दायिनी सेवा का हो रहा अंत

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Edited By Amrit Vichar
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संजय कनेरा, हल्द्वानी। प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए सरकार की ओर से वैसे तो कई प्रयास किए जा रहे है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह प्रयास धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं। इसी का एक उदाहरण हैं जिले के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं के लिए प्रयोग होने वाले वाहन। …

संजय कनेरा, हल्द्वानी। प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए सरकार की ओर से वैसे तो कई प्रयास किए जा रहे है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह प्रयास धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं। इसी का एक उदाहरण हैं जिले के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं के लिए प्रयोग होने वाले वाहन। स्वास्थ्य सेवाओं के अंर्तगत उपयोग में आने वाले वाहन कई वर्षों से रखरखाव न होने से कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। इन वाहनों को दुरुस्त कराने के बजाए गांव के अस्पतालों में खड़ा कर दिया गया है।

गौलापार के खेड़ा गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लंबे समय से सचल चिकित्सा वाहन और एक मोबाइल स्वास्थ्य वाहन खड़ा किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पूर्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित योजना के तहत इन वाहनों का उपयोग किया जाता था, लेकिन मुख्यालय द्वारा बजट नहीं मिलने के कारण वर्तमान में यह वाहन केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। सैकड़ों लोगों को चिकित्सा सेवाएं देने के बावजूद यहां खड़ी इन गाड़ियों को देखें तो अब यह पूरी तरह से कंडम हो चुकी हैं।

 

जीवन दायिनी का जीवन अब कबाड़

वाहनों के पुर्जे और इंजन पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। यहां तक की इनकी चेचिस भी खुले में रहने के कारण जंग से गलने लगी है और पहिए भी सड़ने लगे हैं। विभागीय लापरवाही के फलस्वरूप वाहनों के आस-पास झाड़ियां उग आई हैं। वाहन के भीतर लगी चिकित्सा मशीनें भी उपयोग में ना आने के कारण खराब हो गई हैं और सीटें भी उधड़ चुकी हैं। अब अधिकारियों ने वाहनों को चिकित्सा प्रयोग में लेने के बजाए इनकों कंडम घोषित कर शासन को सूचित कर दिया है।

 

वाहनों की स्थिति के संबंध में शासन को पूर्व में ही सूचित कर दिया गया है। वहां से कोई जवाब अभी तक नहीं आया है। शासन से बजट आने पर वाहनों को ठीक कराकर प्रयोग में लिया जाएगा।

-डॉ. रश्मि पंत, अपर चिकित्साधिकारी, नैनीताल

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