वैज्ञानिक के बिना बरेली की फॉरेंसिक टीम
बरेली, अमृत विचार। किसी भी अपराध की घटना के खुलासे में फॉरेंसिक टीम का अहम रोल होता है। बरेली में परिक्षेत्रीय स्तर की फील्ड यूनिट (फॉरेंसिक टीम) है। जिले में फॉरेंसिक लैब भी बन रही है, जिसमें डीएनए और साइबर तक की जांचें होंगी। लेकिन वर्तमान में फॉरेंसिक का हाल खराब है। फील्ड यूनिट में …
बरेली, अमृत विचार। किसी भी अपराध की घटना के खुलासे में फॉरेंसिक टीम का अहम रोल होता है। बरेली में परिक्षेत्रीय स्तर की फील्ड यूनिट (फॉरेंसिक टीम) है। जिले में फॉरेंसिक लैब भी बन रही है, जिसमें डीएनए और साइबर तक की जांचें होंगी। लेकिन वर्तमान में फॉरेंसिक का हाल खराब है। फील्ड यूनिट में करीब 3 वर्ष से कोई वैज्ञानिक नहीं है। एक प्रशिक्षण प्राप्त मुख्य आरक्षी से काम चल रहा था। लेकिन उसका भी जिले में समय पूरा होने पर बदायूं तबादला कर दिया गया है। ऐसे में जब तक वैज्ञानिक की पोस्टिंग नहीं होती तब तक सिपाही ही जाकर मौके पर जांच करेंगे।
बरेली फील्ड यूनिट में वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, लैब सहायक, फोटोग्राफर का नियतन है। तीन साल पहले बच्चू सिंह सहायक वैज्ञानिक अधिकारी थे। उनका तबादला हो गया। पांच साल पहले उप निदेशक डा. वंदना दुबे भी फील्ड यूनिट में थीं। लेकिन उनका मुरादाबाद की लैब में तबादला हो गया। अब वह बरेली जिले में बन रही फोरेंसिक लैब की नोडल अधिकारी हैं।
करीब तीन साल से फिंगर प्रिंट, घटना स्थल निरीक्षण और फोटोग्राफी का प्रशिक्षण प्राप्त मुख्य आरक्षी केपी सिंह ही टीम के साथ घटनाओं पर जाकर निरीक्षण कर रिपोर्ट देते थे। उनका जिले में समय पूरा होने पर तबादला कर दिया गया और बदायूं के लिए रिलीव कर दिया गया। मौजूदा समय में सिपाही धर्मपाल और चालक अर्पित ही पुराने बचे हैं। धर्मपाल ने फोटोग्राफी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। कुछ दिनों पहले एक सिपाही की भी पोस्टिंग की गई है। जिले में एक फोरेंसिक वैन भी है, जो जोन स्तर की है। लेकिन वैज्ञानिक न होने की वजह से इसका सिर्फ जिले में ही इस्तेमाल हो रहा है।
