फिर चुनाव

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Edited By Amrit Vichar
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भारत निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव कराने का कार्यक्रम जारी कर दिया। पांचों राज्यों में इसके साथ ही चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। देश में चुनाव का दौर कुछ समय के अंतराल पर चलता ही रहता है। हर साल किसी न किसी राज्य के …

भारत निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव कराने का कार्यक्रम जारी कर दिया। पांचों राज्यों में इसके साथ ही चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। देश में चुनाव का दौर कुछ समय के अंतराल पर चलता ही रहता है। हर साल किसी न किसी राज्य के विधानसभा या फिर विधान परिषद अथवा राज्यसभा के चुनाव होते ही रहते हैं।

इन पांच राज्यों के बाद अगले साल देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जाने हैं, जिसकी तैयारी भी तेज है। अलग-अलग राज्यों में होती रहने वाली चुनाव प्रक्रिया में बहुत सरकारी धन खर्च किया जाता है। ऊपर से सरकारी मशीनरी को लगना होता है।

बार-बार चुनाव से सरकारी कार्य भी प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि देश में एक साथ चुनाव कराने के सुझाव काफी समय से दिए जाते रहे हैं। इसके तहत देश में लोकसभा और सभी प्रांतों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है। केंद्र सरकार भी इस सुझाव पर विचार कर चुकी है लेकिन इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। हालांकि एक देश,एक चुनाव की प्रक्रिया बेहद कठिन काम है। इस पर असहमति जताने वाले इस प्रक्रिया को व्यवहारिक भी नहीं मानते लेकिन इस तर्क में भी दम है कि एक साथ पूरे देश में चुनाव होने से देश को बार-बार चुनाव के बोझ से मुक्ति मिल सकेगी और अलग-अलग चुनाव पर होने वाला भारी-भरकम खर्च भी बच सकेगा।

यह संभव है कि एक साथ होने वाला चुनाव देश की राजनीति को एक नई दिशा दे दे। बहरहाल, यह तो भविष्य में तय होगा कि देश में एक साथ चुनाव कराए जाएंगे या नहीं लेकिन हाल में होने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कई राजनीतिक दलों का भविष्य तय होना है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल पर सबकी निगाहें हैं, जहां सत्ताधीन तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को हिलाने में भाजपा पिछले काफी दिनों से लगी हुई है इसलिए दोनों दलों में कड़ा मुकाबला होना है। पांच राज्यों में से केवल असम को छोड़कर कहीं भी भाजपा की सरकार नहीं है।

असम में भी वह पिछली बार बहुमत से चार सीटें कम ही हासिल कर सकी थी और उसके बाद बाहरी विधायकों से समर्थन लेकर सरकार बना पाई, इसलिए इस राज्य में सत्ता विरोधी लहर से जूझते हुए उसके सामने वापसी की चुनौती है। केरल में माकपा की अगुवाई में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और तमिलनाडु में एआईएडीएमके की सरकार को चुनौती देना भी भाजपा के लिए आसान नहीं है। पुडुचेरी में अभी हाल में ही कांग्रेस सरकार उखड़ चुकी है और वहां राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। ऐसे में भाजपा को पुडुचेरी में भी सत्ता के लिए काफी जोर-आजमाइश करनी होगी।