जनसंख्या नियंत्रण
देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की मांग तेज होने लगी है। रविवार को ट्विटर पर बड़ी संख्या में यूजर्स पापुलेशन कंट्रोल बिल की मांग करते दिखाई दिए। इन यूजर्स ने एक स्वर में कहा है कि जनसंख्या नियंत्रित करने का समय आ चुका है इसलिए सरकार को इस पर बिल लाना चाहिए। …
देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की मांग तेज होने लगी है। रविवार को ट्विटर पर बड़ी संख्या में यूजर्स पापुलेशन कंट्रोल बिल की मांग करते दिखाई दिए। इन यूजर्स ने एक स्वर में कहा है कि जनसंख्या नियंत्रित करने का समय आ चुका है इसलिए सरकार को इस पर बिल लाना चाहिए। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब जनसंख्या नियंत्रण के लिए देश में आवाज उठाई गई है। इसकी मांग अर्से से उठती आ रही है। बुद्धिजीवी तबका इस मांग की सदैव हिमायती रहा है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है। यहां लगातार बढ़ती जनसंख्या ने बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ अन्य कई चुनौतियों को भी सामने खड़ा किया है। आबादी के ही कारण शहरीकरण बढ़ता जा रहा है। गांव सिमट रहे हैं। रिहाइशी जरूरतों ने कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए हैं। पेड़ों का अंधाधुंध कटान हो रहा है। उनके स्थान पर बड़ी-बड़ी इमारतें बनती जा रही हैं और अब तो नौबत यह आ गई है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे देश के प्रमुख महानगरों में आबादी इतनी बढ़ चुकी है कि आने वाले कुछ ही वक्त में रहने को जगह शायद ही बचे।
जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता की मुहिम हमारे देश में काफी समय से चलाई जा रही है। हम दो-हमारे दो के नारे दिए गए। हालांकि बहुत सारे परिवारों ने बढ़ते खर्चों के बीच बच्चों की संख्या सीमित की है लेकिन निचले तबके की एक बड़ी आबादी में इस जागरूकता का कोई असर नहीं है। बच्चों की संख्या पर नियंत्रण जैसा कोई कानून न होने, रूढ़िवादिता को बनाने रखने और सामाजिक मान्यता की सोच से घिरे इस तबके के बहुत सारे लोगों में परिवार नियोजन गलत माना जाता है।
यह सच है कि देश के नियोजित विकास और सबको बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जनसंख्या नियंत्रण आवश्यक है लेकिन हमारे देश में इसको कानूनी लबादा ओढ़ाकर लागू किया जाना असंगत माना जाता है। समझा जा सकता है कि सरकार के लिए ऐसा करने पर पुरजोर विरोध का सामना करना होगा और उस पर एक तबके के दमन के स्वाभाविक आरोप लगने शुरू हो जाएंगे।
बेहतर यही होगा कि हम ऐसी सोच विकसित करें, जिससे लोग अच्छे जीवन यापन के लिए जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को अपनाने के लिए स्वयं प्रेरित हों। एक सुझाव यह कि आबादी नियंत्रित करना एक पहलू है, दूसरा पहलू आबादी के नियोजन का भी है। हर हाथ को सरकार ऐसा काम दे, जिससे न सिर्फ हर व्यक्ति को रोजी-रोटी का जरिया मिल सके, बल्कि उस काम के बदले वह देश के आर्थिक विकास में भी अहम योगदान कर सके।
