हल्द्वानी: बेमियादी हड़ताल पर गए सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कर्मी
हल्द्वानी, अमृत विचार। नियमावली लागू होने के आठ साल बाद भी नियमितीकरण न होने से नाराज राज्य भर के सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास के सभी 204 संविदा कर्मी बेमियादी हड़ताल पर चले गए। उन्होंने पुनर्वास निदेशक पर नियमावली लागू न करने का आरोप लगाया और इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। चेताया कि नियमितीकरण का अधिकार मिलने …
हल्द्वानी, अमृत विचार। नियमावली लागू होने के आठ साल बाद भी नियमितीकरण न होने से नाराज राज्य भर के सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास के सभी 204 संविदा कर्मी बेमियादी हड़ताल पर चले गए। उन्होंने पुनर्वास निदेशक पर नियमावली लागू न करने का आरोप लगाया और इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। चेताया कि नियमितीकरण का अधिकार मिलने तक हड़ताल पर डटे रहेंगे।
सोमवार को कमोबेश राज्य के अन्य सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय की तरह ही हल्द्वानी में संविदा कर्मियों ने बेमियादी कार्य बहिष्कार के साथ प्रदर्शन किया। हड़ताली कर्मियों ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2013 में नियमावली लागू कर दी थी। इसके तहत अन्य विभागों की तरह ही पुनर्वास कार्यालय के संविदा कर्मियों के नियमानुसार नियमितीकरण होना था। वर्ष 2005 से राज्य भर के कार्यालयों में 205 कर्मी संविदा पर कार्यरत हैं, लेकिन आज तक इनका विनियमितीकरण नहीं किया गया। सातवें वेतनमान का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। उल्टा दो वर्ष पहले से बोनस देना भी बंद कर दिया गया।
हड़ताली कर्मियों ने कहा कि इस अन्याय को लेकर क्षेत्रीय विधायकों से लेकर मंत्रियों तक गए। लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री से समस्या और आंदोलन पर संज्ञान लेते हुए नियमितीकरण की मांग की।
इस मौके पर सुरेंद्र सिंह रौतेला, ललित सिंह, नरेंद्र सिंह बोहरा, कैलाश चंद्र, शंकर सिंह, जगत सिंह बोरा, भगवत सिंह चौहान दिलीप सिंह, उमेद सिंह, लक्ष्मण सिंह, पूरन सिंह, गोपाल सिंह आदि थे।
सैनिक कल्याण अधिकारी और 13 कर्मियों पर आया काम का बोझ
हल्द्वानी। राज्य भर के सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालयों में अधिकारियों को छोड़कर महज 13 कर्मी ही नियमित हैं। संविदा कर्मियों की हड़ताल से अधिकारी और चुनिंदा कर्मियों के काम के बोझ से हाथपांव फूल गए हैं। नतीजन सभी कार्यालयों का कामकाज ठप सा हो गया है।
