संक्रमण के बीच स्कूल

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Edited By Amrit Vichar
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लगभग एक साल बाद प्रदेश में बेिसक शिक्षा परिषद के स्कूल भी खोल दिए गए हैं। इससे फिर बच्चों की पढ़ाई पटरी पर आने की बात जरूर कही जा रही है लेकिन ऐसा होना इसलिए मुश्किल है क्योंकि बीते एक साल का सिलेबस अब परीक्षाओं के लगभग एक माह में ही पूरा हो पाना मुश्किल …

लगभग एक साल बाद प्रदेश में बेिसक शिक्षा परिषद के स्कूल भी खोल दिए गए हैं। इससे फिर बच्चों की पढ़ाई पटरी पर आने की बात जरूर कही जा रही है लेकिन ऐसा होना इसलिए मुश्किल है क्योंकि बीते एक साल का सिलेबस अब परीक्षाओं के लगभग एक माह में ही पूरा हो पाना मुश्किल है।

वैसे भी शिक्षकों को अब यूपी बोर्ड परीक्षाओं और पंचायत चुनाव में जुटना है। ऐसे में, पढ़ाई तो वैसे ही नहीं हो सकेगी। दूसरी ओर महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोरोना की नई लहर उठने की बात सामने आ रही है। यूपी में भी केस मिलने बंद नहीं हुए हैं।

विशेषज्ञ भी लगातार चेता रहे हैं कि बढ़ती गर्मी के बीच कोरोना फिर से सिर उठा सकता है। जािहर है कि यदि ऐसा हुआ तो फिर देश भर में महामारी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। लॉकडाउन लगा तो लोगों के सामने फिर रोजी-रोटी की दुश्वारियां होंगी। वैसे भी, लोग पिछले साल लगाए गए लॉकडाउन की दिक्कतों से अब तक पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। लॉकडाउन में जिनकी नौकरी गई, उनमें से बहुतों को अभी तक रोजगार मुहैया नहीं हुए हैं। काम-धंधे भी पटरी पर नहीं आ सके हैं।

अलबत्ता, देश भर में कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है। निजी अस्पतालों में आम लोगों के लिए वैक्सीन मुहैया कराई गई हैं लेकिन अभी भी यह सुनिश्चित नहीं हो सका है कि ये वैक्सीन शत-प्रतिशत कारगर है। ऐसे में, कोरोना महामारी की नई लहर को लेकर आशंकाएं निर्मूल नहीं कही जा सकतीं।

जहां तक स्कूलों को खोले जाने का निर्णय है तो बच्चों की पढ़ाई के लिए यह कदम उठाना उचित ही है लेकिन अब चूंकि नए शैक्षिक सत्र के लिए कुछ ही माह का समय बचा था इसलिए कुछ समय और इंतजार किया जा सकता था। वैसे भी, पढ़ाई बाधित होने से बच्चे परीक्षाओं में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे।

ऐसे में, वर्तमान शैक्षिक सत्र को शून्य घोषित करके बोर्ड के इतर अन्य कक्षाओं के बच्चों को प्रोन्नत करने की मांग तर्कसंगत लगती है। सवाल यह है कि पूरे साल बिना पढ़ाई के शैक्षिक सत्र शून्य घोषित क्यों नहीं किया जाना चाहिए? यदि शैक्षिक सत्र शून्य घोषित होता तो स्कूल खुलने से बच्चों को कोरोना संक्रमण के खतरे की आशंका भी नहीं रहती। बहरहाल, अब जब स्कूल खोले ही जा चुके हैं तो शिक्षकों और शिक्षा विभाग की जिम्मेदार है कि वह स्कूल में वे सारे जरूरी उपाय करें जिससे कि बच्चों तक संक्रमण न पहुंच पाए। दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी उपाय लगातार स्कूलों में बनाए रखना आवश्यक है।