अदालत का कड़ा फैसला
बिहार में साढ़े चार साल पहले हुए चर्चित खजूरबानी जहरीली शराब कांड में गोपालगंज की अदालत की ओर से 13 दोषियों में से नौ को फांसी और चार महिलाओं को आजीवन कारावास की सजा सुनाने का फैसला देश भर में कड़े अदालती कदम का संदेश देगा। यह शराब कांड 19 अगस्त 2016 में हुआ था। …
बिहार में साढ़े चार साल पहले हुए चर्चित खजूरबानी जहरीली शराब कांड में गोपालगंज की अदालत की ओर से 13 दोषियों में से नौ को फांसी और चार महिलाओं को आजीवन कारावास की सजा सुनाने का फैसला देश भर में कड़े अदालती कदम का संदेश देगा।
यह शराब कांड 19 अगस्त 2016 में हुआ था। इसमें जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 6 लोग अंधे हो गए थे। सरकार की सख्ती के बाद पुलिस ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई और इस कांड के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करके पकड़ा और उनको जेल भेजा।
बिहार की अदालत का यह फैसला वहां की राज्य सरकार की ओर से जहरीली शराब से मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को फांसी की सजा देने के लिए कानून बनाने के बाद आया है। जाहिर है कि यदि कानून कड़ा होगा तो दोषी सजा पाएंगे।
इस लिहाज से प्रदेश सरकार भी सराहना की पात्र है। यह कानून उत्तर प्रदेश और गुजरात राज्यों में भी बना हुआ है और पंजाब की राज्य सरकार भी ऐसा कानून बनाने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष विधेयक लाने जा रही है। उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब के कई कांड हो चुके हैं। दो महीने पहले जनवरी में बुलंदशहर जिले में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो गई।
हाल में ही मीरजापुर जनपद में भी जहरीली शराब से कुछ लोगों की मौत हुई। अब चूंकि बिहार राज्य में कोर्ट ने जहरीली शराब बनाने के दोषी लोगों को फांसी की सजा दी है तो उम्मीद की जा सकती है कि उत्तर प्रदेश में भी अदालतें ऐसे निर्णय देंगी। इससे जहरीली शराब का काम करने वाले डरेंगे और काफी हद तक जहरीली और अवैध शराब के काम पर रोकथाम हो सकेगी।
शराब पीना स्वास्थ्य और सामाजिक, किसी भी दृष्टिकोण से ठीक नहीं समझा जाता, उस पर भी जो लोग जहरीली शराब बनाकर बेचते हैं वे मौत के सौदागर से कम नहीं होते, इसलिए ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले यह जरूरी है। लेकिन सिर्फ शराब बेचने और उसे बनाने वाले ही दोषी नहीं हैं, अवैध रूप से शराब बिकवाने में संरक्षण देने वाले भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।
गांवों में अवैध रूप से बनने वाली शराब के अड्डे चलाए जाते हैं। इनके जरिए पैसे के लिए लोगों की जान से खेला जाता है, लेकिन पुलिस मौन रहती है। कई गांवों में तो नेताओं के संरक्षण में ये अड्डे चलाए जाते हैं। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह अवैध शराब के अड्डों को संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई करे तभी काफी हद तक शराब माफिया पर लगाम लग सकेगी।
