धार्मिक स्थलों की शिफ्टिंग
उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी जिलों में जनवरी 2011 के बाद सड़कों के किनारे या रास्तों पर बनाए गए सारे धार्मिक स्थलों को हटाने की रणनीति नौकरशाही को अंजाम देनी है। इन धार्मिक स्थलों को सड़क किनारे और रास्तों से हटाकर अन्यत्र शिफ्ट किया जाना है। प्रदेश सरकार ने …
उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी जिलों में जनवरी 2011 के बाद सड़कों के किनारे या रास्तों पर बनाए गए सारे धार्मिक स्थलों को हटाने की रणनीति नौकरशाही को अंजाम देनी है। इन धार्मिक स्थलों को सड़क किनारे और रास्तों से हटाकर अन्यत्र शिफ्ट किया जाना है। प्रदेश सरकार ने यह भी कह दिया है कि आगे से रास्तों या सड़क किनारे धार्मिक स्थलों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रदेश सरकार इस मामले में चार साल बाद जागी है, अब देखना है कि सभी जिलों के अधिकारी कितना इसका अनुपालन करा पाते हैं या फिर ऐसे धार्मिक स्थलों को कागजों में ही शिफ्ट कर देंगे।
असल में, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 3 जून 2016 को प्रदेश सरकार को हाईवे, चौराहों और सड़क किनारे एक जनवरी 2011 या उसके बाद अतिक्रमण करके बनाए गए धार्मिक स्थलों को शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। इस आदेश पर प्रदेश सरकार को 7 जनवरी 2017 तक होर्ट में अनुपालन रिपोर्ट भी देनी थी यानी खंडपीठ के आदेश के छह माह के अंदर अतिक्रमण करके बनाए गए सभी धार्मिक स्थल शिफ्ट कर दिए जाने थे लेकिन इसको तत्कालीन राज्य सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया और सरकारी मशीनरी ने भी अनुपालन नहीं किया। नतीजतन, गत 24 फरवरी को इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जब अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर नाराजगी जताई तो सरकार को आदेश जारी करना पड़ा है।
बहरहाल, अधिकांश जिलों में जनवरी 2011 और उसके बाद अतिक्रमण करके सड़कों के िकनारे और रास्तों पर बनाए गए धार्मिक स्थलों को पहले ही चिन्हित कर लिया गया था। ऐसे धार्मिक स्थलों के प्रमुखों को नोटिस भी दिए गए थे। इस मामले में अहम सवाल यह है कि धर्म के नाम पर कहीं भी, किसी भी स्थान पर धार्मिक स्थल बनाने ही क्यों दिए गए? जब ऐसे धार्मिक स्थल बनाए गए या बनाए जाते हैं तो सरकारी मशीनरी क्यों चुप्पी साधे रहती है?
अगर इनका निर्माण कराते वक्त रोका गया होता तो शायद अब इन्हें हटाने की इतनी मशक्कत नहीं करनी होती। हाईकोर्ट ने अतिक्रमण कर बनाए गए धार्मिक स्थलों को इसलिए शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं क्योंकि सड़क किनारे और रास्ते में इनके बने होने की वजह से आवागमन में दिक्कतें आती हैं। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने कहा था कि हर नागरिक के पास स्वतंत्र आवाजाही का मौलिक अधिकार है और इसके हनन की इजाजत नहीं दी जा सकती।
