आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देने के खिलाफ आईएमए की याचिका पर केन्द्र को नोटिस
नई दिल्ली। भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद (सीसीआईएम) द्वारा आयुर्वेद से स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले आदेश के खिलाफ आईएमए की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केन्द्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और …
नई दिल्ली। भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद (सीसीआईएम) द्वारा आयुर्वेद से स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले आदेश के खिलाफ आईएमए की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केन्द्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन की पीठ ने आयुष मंत्रालय, सीसीआईएम और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
आईएमए ने उच्चतम न्यायालय में अपील कर आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले संशोधनों/नियमों को खारिज करने या रद्द करने का अनुरोध किया है तथा घोषणा की है कि आयोग को पाठ्यक्रम में एलोपैथी को शामिल करने का अधिकार नहीं है। सीसीआईएम की अधिसूचना के तहत, भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद (आयुर्वेद शिक्षा स्नात्कोत्तर) नियम, 2016 में संशोधन करके 39 सामान्य सर्जरी और आंख, कान, नाक और गले से जुड़ी 19 तरह की सर्जरी को सूची में शामिल किया गया है।
