बरेली: दो साल की लंबी जांच के बाद पहली गिरफ्तारी
अमृत विचार, बरेली। बरेली कॉलेज में एक जगह पर परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए बड़ा परीक्षा भवन बनाया गया। इसको बनाने में कई खेल किए गए। सबसे ज्यादा खेल टेंडर प्रक्रिया में हुए। करीब ढाई साल मामले को हो गए। दो साल से क्राइम ब्रांच जांच कर रही है लेकिन अब जाकर पहली गिरफ्तारी हो …
अमृत विचार, बरेली। बरेली कॉलेज में एक जगह पर परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए बड़ा परीक्षा भवन बनाया गया। इसको बनाने में कई खेल किए गए। सबसे ज्यादा खेल टेंडर प्रक्रिया में हुए। करीब ढाई साल मामले को हो गए। दो साल से क्राइम ब्रांच जांच कर रही है लेकिन अब जाकर पहली गिरफ्तारी हो पाई। अभी और भी गिरफ्तारियां होनी हैं लेकिन पहली गिरफ्तारी के लिए क्राइम ब्रांच को पीडब्ल्यूडी की तकनीकी जांच का मजबूत आधार मिला।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने कमेटी की जांच के बाद प्रबंध समिति के पदाधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज करायी थी। मामला बड़ा होने के चलते जांच क्राइम ब्रांच को दी गई लेकिन प्रबंध समिति से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी आसान नहीं थी। सितंबर 2020 में एसएसपी ने पीडब्ल्यूडी को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए लिखा था। इसके बाद अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी ने बरेली कॉलेज के प्राचार्य से रिपोर्ट मांगी थी।
क्राइम ब्रांच और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त जांच में आया कि निविदा आमंत्रण किसी समाचार पत्र में प्रकाशित नहीं किया गया। सिर्फ नोटिस बोर्ड पर आदेश जारी कर ठेकेदार से काम शुरू करा दिया गया। एक ही अनुबंध की लागत पर दो से तीन गुना लागत का कार्य कराया गया। इसके वेरीयेशन की अनुमति सक्षम अधिकारी से प्राप्त नहीं की गई। सभी निर्माण कार्यों के आगणन आर्किटेक्ट योगेंद्र से कराए गए लेकिन तकनीकी स्वीकृति सक्षम अधिकारी से प्राप्त नहीं की गई। सिर्फ प्रधानाचार्य के दस्तखत कराए गए।
परीक्षा भवन के ग्राउंड फ्लोर के निर्माण के लिए निविदाएं जारी की गईं लेकिन उसके बाद बिना टेंडर कराए प्रथम व द्वितीय तल का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्यों के एस्टीमेट का किसी सरकारी विभाग से मूल्यांकन व सत्यापन नहीं कराया गया। प्रबंध समिति के द्वारा मै़ एससी टंडन एंड कं. का रजिस्ट्रेशन, सोलवेंसी और करेक्टर सर्टिफिकेट संलग्न न होने के बावजूद पात्र घोषित कर दिया गया।
वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 में दर्शायी गई आय के सापेक्ष वास्तविक व्यय परीक्षण वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 अनुमानित व्यय से वास्तविक व्यय अधिक पाया गया। विद्यालय के बजट वर्ष 2016-17 में व्यय की व्यवस्था न होते हुए भी 43 लाख से अधिक की धनराशि खर्च की गई।
क्राइम ब्रांच ने जांच में पाया कि परीक्षा भवन, सीसी रोड, प्राचार्य दफ्तर के सामने टीन शेड और स्टाफ क्वार्टर में करोड़ों रुपये खर्च किए गए और इनमें अनियमितताएं कर खेल किया गया। सोमवार को क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर एसके कटियार, इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार, हे. कां. अनुज कुमार और कांस्टेबल नीरज कुमार ने बरेली कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति, पूर्व प्राचार्य सोमेश यादव, पूर्व प्राचार्य अजय शर्मा, उपाध्यक्ष काजी अलीमुद्दीन के घर दबिश दी।
पुलिस को सिर्फ अलीमुद्दीन ही घर पर मिले जिन्हें पहले पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया। अलीमुद्दीन ने ही ज्यादातर बैठकों की अध्यक्षता की थी। चेक पर भी उनके हस्ताक्षर थे। उन्होंने बैठकों में शामिल होने और हस्ताक्षर की बात भी क्राइम ब्रांच को बताई है।
