बरेली: उपाध्यक्ष को भेजा जेल, सचिव व दो पूर्व प्राचार्यों की गिरफ्तारी जल्द
अमृत विचार, बरेली। बरेली कॉलेज में परीक्षा भवन व अन्य निर्माण में अनियमितता व गबन के आरोपी काजी अलीमुद्दीन को क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने अलीमुद्दीन को जेल भेज दिया है। वहीं, इस मामले से जुड़े अन्य आरोपी सचिव देवमूर्ति, पूर्व प्राचार्य सोमेश यादव, अजय शर्मा, ठेकेदार मकसूद पुलिस …
अमृत विचार, बरेली। बरेली कॉलेज में परीक्षा भवन व अन्य निर्माण में अनियमितता व गबन के आरोपी काजी अलीमुद्दीन को क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने अलीमुद्दीन को जेल भेज दिया है। वहीं, इस मामले से जुड़े अन्य आरोपी सचिव देवमूर्ति, पूर्व प्राचार्य सोमेश यादव, अजय शर्मा, ठेकेदार मकसूद पुलिस की दबिश पड़ने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत की जुगत में लग गए हैं। इसके लिए हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया है। क्राइम ब्रांच जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास करेगी।
दो साल पहले दर्ज मुकदमें में क्राइम ब्रांच ने सोमवार को सभी आरोपियों के घर दबिश दी थी। सबसे पहले दबिश बरेली कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति के घर दी गई। यहां दबिश पड़ते ही कॉलेज से जुड़े लोग भी उनके घर पहुंच गए। यहां विवेचक की देवमूर्ति के बेटे से नोकझोंक भी हुई। उसके बाद पुलिस ने उपाध्यक्ष काजी अलीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। अलीमुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद से अन्य आरोपी गिरफ्तारी से बचने की जुगत लगाने लगे।
इससे जुड़े अन्य लोग भी पूरी सतर्कता बरत रहे हैं ताकि उनका नाम न खुल जाए। इस मामले में एक ठेकेदार मकसूद का नाम भी क्राइम ब्रांच ने विवेचना में खोला है। इसी ठेकेदार को टेंडर देकर गलत तरीके से काम कराए गए। क्राइम ब्रांच ठेकेदार को भी गिरफ्तार करेगी। ठेकेदार की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा कि कितने का खेल हुआ।
दो साल पहले मंडलायुक्त से कर्मचारियों ने भवन निर्माण, साइकिल ठेका, सुरक्षाकर्मियों की भर्ती, प्राचार्य और प्राध्यापकों को पारिश्रमिक व अन्य मामलों की शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामले की जांच कराने के लिए डीएम को लिखा था। डीएम के आदेश पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी डा. राजेश प्रकाश ने मामले की जांच की थी। जांच में कोषाधिकारी, दो लेखाधिकारी और एक ऑडिटर शामिल थे। जांच में गड़बड़ी पाए जाने की रिपोर्ट मंडलायुक्त को दी गई थी। प्राचार्य और प्राध्यापकों को पारिश्रमिक भी गलत देना पाया गया था।
डीएम के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और शासन को भी रिपोर्ट भेजी गई थी। क्राइम ब्रांच ने जांच में पाया कि कैंपस क्लीनिंग और ब्यूटीफिकेशन की अनुमानित लागत पांच लाख रुपये तय की गई लेकिन इस पर आठ लाख रुपये खर्च किए गए। अतिरिक्त कंस्टेंट फीस की लागत आठ लाख रुपये रखी गई लेकिन साढ़े नौ लाख रुपये खर्च किए गए। इसी तरह विद्युतीकरण व मरम्मत का अनुमानित खर्च आठ लाख रुपये रखा गया लेकिन पौने दस लाख रुपये खर्च किए गए।
एक लाख से अधिक की खरीद भी बिना टेंडर के
महाविद्यालय द्वारा निजी बैंक में खाते संचालित किए जा रहे हैं लेकिन सरकारी बैंक में खाते नहीं खुलवाए गए। क्राइम ब्रांच को व्यक्तिगत और संस्थागत छात्रों की संख्या भी उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही इनसे हुई आमदनी बताई गई। चपरासियों को दी जाने वाली वर्दी में भी खेल किया गया। इसके अलावा गैरपंजीकृत कंपनी से कुर्सियां खरीदी गईं। जीएसटी का भुगतान न करके राजस्व का नुकसान किया गया। वनस्पति विज्ञान प्रयोगशाला निधि से दो बार में करीब पांच लाख रुपये की सामग्री खरीदी गई लेकिन बिना टेंडर के जबकि एक लाख रुपये से अधिक की खरीद पर टेंडर होना चाहिए।
क्राइम ब्रांच ने बरेली कॉलेज से कई बार दस्तावेज मांगे लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। एक महीने पहले प्राचार्य कार्यालय से जुड़े एक कर्मचारी से दस्तावेज मांगे गए तो बताया गया कि वह बीमारी की वजह से छुट्टी पर गए हैं। वह अभी भी छुट्टी पर ही हैं लेकिन आए दिन कॉलेज में नजर आ जाते हैं। दस्तावेज उपलब्ध न कराने की वजह से भी क्राइम ब्रांच की जांच अटकी हुई है।
एक अन्य भवन के निर्माण में भी खेल
बरेली कॉलेज के परीक्षा भवन के पास में ही एक अन्य भवन भी बनाया गया है। इसका कुछ हिस्सा बनना शेष है। इस भवन के निर्माण का भी टेंडर नहीं किया गया। इसे ही परीक्षा भवन के टेंडर के साथ ही बना दिया गया। इसे लेकर क्राइम ब्रांच ने बरेली कॉलेज से रिपोर्ट मांगी लेकिन अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
क्राइम ब्रांच द्वारा लंबे समय बाद गिरफ्तारी के बाद कई तरह की चर्चाएं हैं। कोई कह रहा है कि बड़े स्तर पर अधिकारियों के आदेश के बाद दबिश दी गई लेकिन अब मामले को मैनेज किया जा रहा है। हालांकि, क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामले में विवेचना की जा रही है। विवेचना के आधार पर गिरफ्तारी की जाएगी।
