हल्द्वानी: मार्च माह में ही 66 क्यूसेक पहुंचा गौला का जलस्तर, मई-जून में बढ़ सकती हैं दिक्कतें
हल्द्वानी, अमृत विचार। गौला नदी में इस बार मार्च महीने में ही पानी का स्तर कम हो गया है। गौला में पानी 66 क्यूसेक रह गया है। जबकि पिछले वर्ष मार्च के महीने में नदी में 170 क्यूसेक पानी था। गौला नदी में इस तरह पानी का स्तर घटने से मई-जून माह में हल्द्वानी की …
हल्द्वानी, अमृत विचार। गौला नदी में इस बार मार्च महीने में ही पानी का स्तर कम हो गया है। गौला में पानी 66 क्यूसेक रह गया है। जबकि पिछले वर्ष मार्च के महीने में नदी में 170 क्यूसेक पानी था। गौला नदी में इस तरह पानी का स्तर घटने से मई-जून माह में हल्द्वानी की जनता को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। मई-जून के माह में नदी का जलस्तर 58 क्यूसेक तक चला जाता है, लेकिन अभी से ऐसी स्थिति होने से जलसंस्थान के अधिकारियों की भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
विभाग के सहायक अभियंता नीरज तिवारी का कहना है कि गौला नदी में पानी का इस तरह स्तर कम होने से आने वाले दिनों में शहर की जनता को पेयजल उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, जलसंस्थान के पास 7 टैंकर और 66 नलकूप शहर की जनता को पेयजल मुहैया कराने के लिए मौजूद हैं। इसी तरह ग्रमीण क्षेत्रों में रह रहे लोगो के लिए 22 नलकूप सिंचाई विभाग के जलसंस्थान को हस्तांतरित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शहर में विभाग की पाइप लाइन में कई बड़े लीकेज और कई स्थानों पर से उनके क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी की किल्लत अभी से शुरू हो गई है, जो आगे चलकर और बढ़ सकती है। सवाल इस बात का है कि विभाग अपने 7 टैंकरों के सहारे किन-किन क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति कर सकेगा।
मलिन बस्तियों में दूषित पेयजल की आपूर्ति
शहर की मलिन बस्तियों में दूषित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह बताई जाती है कि यहां के घरों में लिए गए पानी के कनेक्शनों को नाली से पाइप डालकर लिया गया है, जिसके टूटने पर या लाइन के क्षतिग्रस्त होने पर राजपुरा और इंदिरा नगर की मलिन बस्तियों में दूषित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इन बस्तियों में दूषित पेयजल की आपूर्ति से यहां की जनता में आक्रोश है। साथ ही गर्मी के दिनों में यहां संक्रामक रोग भी दूषित पानी पीने से फैल सकता है।
