नुकसान पर जुर्माना
हरियाणा सरकार ने कैबिनेट में संपत्ति क्षति वसूली विधेयक पास कर दिया है। इसके मुताबिक अब किसी भी आंदोलन की आड़ में तोड़फोड़ नहीं चलेगी। अगर तोड़फोड़ की गई तो ऐसा करने वालों से नुकसान की रिकवरी की जाएगी। यह जरूरी भी है और ऐसा कानून पूरे देश में बनना चाहिए। हाेता यह है कि …
हरियाणा सरकार ने कैबिनेट में संपत्ति क्षति वसूली विधेयक पास कर दिया है। इसके मुताबिक अब किसी भी आंदोलन की आड़ में तोड़फोड़ नहीं चलेगी। अगर तोड़फोड़ की गई तो ऐसा करने वालों से नुकसान की रिकवरी की जाएगी। यह जरूरी भी है और ऐसा कानून पूरे देश में बनना चाहिए। हाेता यह है कि आंदोलन के नाम पर लोग सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे काफी नुकसान होता है। पब्लिक और सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई नहीं होती। अब चूंकि यह कानून बन गया है तो बहुत सारे आंदोलनों में तोड़फोड़ की संभावना रुकेगी।
अलबत्ता, उत्तर प्रदेश में ऐसा कानून पहले से ही लागू है। योगी सरकार ने ऐसा ही कानून बनाया था। एनआरसी विरोध के आंदोलन के नाम पर नुकसान करने वालों के न सिर्फ नाम और चेहरे सार्वजनिक किए गए थे बल्कि उनको नुकसान से भरपाई करने को नोटिस भी दिया गया था। यह रिकवरी राजस्व नियमों की भांति की जानी थी। हालांकि इस नियम को हाईकोर्ट चुनौती दी गई थी।
लोकतंत्र में आंदोलन को गलत नहीं माना गया है। आंदोलन का मतलब है कि आप अपनी बात को कह सकते हैं। संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है और आंदोलन के जरिए धरना-प्रदर्शन की भी छूट दी गई है लेकिन यह आंदोलन अहिंसात्मक होने चाहिए। ऐसे आंदोलन संविधान की मूलभावना के विपरीत हैं और गैरकानूनी भी, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाए। यह तो हिंसात्मक प्रवृत्ति है। लोग आंदोलन की आड़ में आगजनी करते हैं। बसों को नुकसान पहुंचाते हैं।
ऐसे आंदोलनों पर लगाम लगाना जरूरी है। ऐसा करने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार का कानून महत्वपूर्ण हो जाता है। इस बिल के मुतािबक,संपत्ति की क्षति पर छह महीने तक हर्जाना नहीं देने पर उस पर छह फीसद ब्याज भी देना पड़ेगा। नुकसान के आकलन के लिए न्यूनतम एसडीएम स्तर के अफसर दावा आयुक्त लगाए जाएंगे और दावा अधिकरण भी गठित होगा। आरोपित अगर जुर्माने की 20 फीसद राशि जमा नहीं कर पाए तो हाईकोर्ट में चुनौती का अधिकार नहीं होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद यह कानून के रूप में पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगा।
