बरेली: जिले की चीनी मिल बेरंग न कर दें किसानों की होली
अमृत विचार, बरेली। होली नजदीक है। किसान खरीदारी की तैयारी में जुटे हैं मगर सिस्टम में बैठे जिम्मेदार उदासीन हैं। इस वजह से जिले की समस्त चीनी मिलें भुगतान के नाम पर किसानों को ठेंगा दिखा रही हैं। इस पेराई सत्र का चीनी मिलों पर करीब 320 करोड़ रुपये का बकाया है। किसानों का कहना …
अमृत विचार, बरेली। होली नजदीक है। किसान खरीदारी की तैयारी में जुटे हैं मगर सिस्टम में बैठे जिम्मेदार उदासीन हैं। इस वजह से जिले की समस्त चीनी मिलें भुगतान के नाम पर किसानों को ठेंगा दिखा रही हैं। इस पेराई सत्र का चीनी मिलों पर करीब 320 करोड़ रुपये का बकाया है।
किसानों का कहना है कि त्योहार में भी भुगतान नहीं मिलने से उनको आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। सरकार के 14 दिन में किसानों का बकाया भुगतान का दावा भी खोखला साबित हो रहा है।
जनपद की पांच चीनी मिलों बहेड़ी, मीरगंज, फरीदपुर, सेमीखेड़ा, नवाबगंज में करीब दो लाख किसान गन्ना बेचकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। सभी चीनी मिलों ने नवंबर में गन्ने की पेराई शुरू की थी। अफसरों ने दावा किया था कि पिछले सत्र का शत-प्रतिशत भुगतान कराने के साथ ही इस सत्र में किसानों को बकाया भुगतान के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
इसी आस में बिचौलियों के सहारे न रहकर किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना दिया लेकिन अब हालत पिछले सत्र की तरह दिख रहे हैं। अफसरों की सुस्ती और चीनी मिलों की मनमानी ने किसानों की मंशा पर पानी फेर दिया। 320 करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया है। सबसे खराब स्थिति बहेड़ी की केसर इंटरप्राइजेज, नवाबगंज की ओसवाल और सेमीखेड़ा की सहकारी चीनी मिल की है।
अकेले इन चीनी मिलों पर किसानों का 270 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। ऐसे में अफसर भले ही शीघ्र शत-प्रतिशत किसानों का बकाया भुगतान का दावा करें, लेकिन वर्तमान के हालात देखकर लग रहा है कि इस पेराई सत्र में भी किसानों को परेशानी उठानी पड़ेगी। गन्ना एक्ट का भी माखौल उड़ाया जा रहा है। कोई भी चीनी मिल इस पर अमल नहीं कर रही।
बोले किसान
रुपयों की जरूरत पर नहीं किया भुगतान
नवाबगंज के ग्राम क्योलड़िया के रामकुमार वर्मा का कहना है कि भतीजी की शादी करनी है। बच्चों की फीस भी जमा करनी है। रुपयों की बहुत जरूरत है। इसलिए जिला गन्ना अधिकारी से मिलने आए थे। इस पेराई सत्र का करीब चार लाख रुपये का भुगतान ओसवाल चीनी मिल ने अभी तक नहीं किया।
होली नजदीक बढ़ी दिक्कत
सेमीखेड़ा के किसान रामकिशोर का कहना है कि पांच बीघा में गन्ने की फसल की बुवाई की थी। गन्ने का भुगतान नहीं मिलने की वजह से श्रमिकों का भुगतान, डीजल, खाद, पानी आदि में तमाम रुपयों की आवश्यकता है। रिश्तेदारी में शादियां भी हैं और होली भी नजदीक हैं। फिर भी सहकारी चीनी मिल भुगतान नहीं कर रही।
इस पेराई सत्र का महज 320 करोड़ रुपये का बकाया रह गया है। चीनी मिल प्रबंधकों पर लगातार भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है। तीन चीनी मिलों को नाटिस भी भेजा गया है। जल्द किसानों को भुगतान हो जाएगा।
– पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
