22 मार्च 2020: सर्वजीत को आज भी डराता है ‘जनता कर्फ्यू’
नवीन जोशी, बनबसा। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए एक साल पहले 22 मार्च 2020 को पूरे देश में लगा जनता कर्फ्यू कई लोगों को आज भी बेहद डराता है। इस एक साल में लोगों को काफी उतार-चढ़ाव देखने के साथ ही काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मेन बाजार बनबसा …
नवीन जोशी, बनबसा। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए एक साल पहले 22 मार्च 2020 को पूरे देश में लगा जनता कर्फ्यू कई लोगों को आज भी बेहद डराता है। इस एक साल में लोगों को काफी उतार-चढ़ाव देखने के साथ ही काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मेन बाजार बनबसा निवासी सर्वजीत तो शायद ही जनता कर्फ्यू को कभी भुला पाएं। क्योंकि 22 मार्च को उनकी शादी तय हुई थी और जनता कर्फ्यू लगने से उनके आयोजन की तैयारियां धरी रह गई। उन्होंने जैसे-तैसे इस आयोजन को पूरा किया था। रिश्तेदार भी दो माह तक उनके घर पर ही फंस गए थे।
सर्वजीत सिंह ने बताया कि पिछले साल 21-22 मार्च को उनकी शादी बदायूं से तय हुई थी। इसके लिए उन्होंने बनबसा में एक बैंक्वेट हॉल बुक किया और करीब एक हजार लोगों को निमंत्रण दिया था। शादी की तारीख नजदीक आते ही उनके घर पर रिश्तेदारों का आना भी शुरू हो गया था। 21 मार्च को आयोजन की तैयारियां शुरू हुई, लेकिन शाम होते ही जब अगले दिन जनता कर्फ्यू का ऐलान हुआ, तो सबके चेहरे मुरझा गए। शादी के आयोजन को लेकर सभी असमंजस में आ गए, क्योंकि 22 मार्च को उसने लड़की के साथ खटीमा के गुरूद्वारे में फेरे लेने थे।
सर्वजीत ने बताया कि 22 मार्च की सुबह वे लोग बनबसा से खटीमा के लिए रवाना हुए तो जगबूढ़ा पुल पर तैनात पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें रोक दिया। काफी मिन्नतें करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनकी जांच-पड़ताल की और खटीमा जाने की अनुमति एक घंटे में वापस लौटने की शर्त पर दी। इस कारण वह एक घंटे के अंदर फेरे लेकर वापस लौट आए। इसके बाद शाम को घर पर पार्टी रखी थी, लेकिन जनता कर्फ्यू की वजह से लोग कम आए और आयोजन भी फीका रहा।
कॉस्मेटिक की दुकान चलाने वाले सर्वजीत ने बताया कि वह शादी को लेकर काफी उत्सुक थे। शादी के बाद गोवा घूमने का भी प्लान बनाया था, लेकिन जनता कर्फ्यू की वजह से आयोजन को सीमित करना पड़ा। पार्टी में 500 लोग भी नहीं आ पाए। संपूर्ण लॉकडाउन लगने से वह गोवा भी नहीं जा सके। व्यापार भी ठप हो गया। जिन रिश्तेदारों के पास अपने वाहन थे, वे तो जैसे-तैसे अपने घरों को चले गए, लेकिन करीब 20-25 रिश्तेदार ऐसे थे, जिनके पास अपने वाहन नहीं थे, वे लॉकडाउन लगने से यहीं फंस गए।
उनके रहने की व्यवस्था घर पर ही करनी पड़ी थी, लेकिन दुकानें बंद होने की वजह से खाने-पीने की दिक्कतें होने लगी। इस बीच जब राशन की दुकानें सीमित समय के लिए खुलने लगी तो घर का एक सदस्य दुकान में जाकर जितना संभव हो पा रहा था, उतना राशन इकट्ठा करने में लगा था। यह सिलसिला दो माह तक चलता रहा। सर्वजीत ने बताया कि आज भले ही जनता कर्फ्यू को एक साल हो गए हों, लेकिन आज भी उन्हें 22 मार्च का वो दिन काफी डराता है।
