बेरोजगारों से ठगी
बरेली के 300 बेड वाले सरकारी अस्पताल में भर्ती के नाम पर स्वास्थ्य विभाग के तीन कर्मचारियों के हाथों 50 बेरोजगारों से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की घटना को छोटी-मोटी घटना कहकर रफा-दफा नहीं किया जा सकता। हालांकि बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर ठगी कोई नई बात भी नहीं है, लेकिन इस ठगी …
बरेली के 300 बेड वाले सरकारी अस्पताल में भर्ती के नाम पर स्वास्थ्य विभाग के तीन कर्मचारियों के हाथों 50 बेरोजगारों से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की घटना को छोटी-मोटी घटना कहकर रफा-दफा नहीं किया जा सकता। हालांकि बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर ठगी कोई नई बात भी नहीं है, लेकिन इस ठगी को सरकारी कर्मचारियों ने ही जिस दुस्साहसिक तरह से अंजाम दिया है यह बात बेहद चौंकाती है। वे संविदा वाली नौकरी दिलाने के नाम पर हर बेरोजगार से तीन से पांच लाख रुपये की ठगी करते रहे। एक-एक करके 50 बेरोजगारों को ठग लिया गया। वह भी बेखौफ। किसी कार्रवाई की जरा भी चिंता किए बिना, तीनों कर्मचारी बेरोजगारों की जेब ढीली करके अपनी जेब भरते रहे।
पूरा राज अभी भले ही नहीं खुल पाया है लेकिन यह संभव है कि इस खेल में और भी बड़े लोग शामिल हो सकते हैं। गिरफ्तार किए गए सिर्फ तीनों कर्मचारी बिना किसी बड़े का हाथ हुए इतना बड़ा दुस्साहस कर पाएंगे, यह बात आसानी से स्वीकार नहीं की जा सकती। इस प्रकरण में यह बात चौंकाती है कि 50 बेरोजगार ठगे जाते रहे। उनसे एक-एक करके वसूली भी होती रही, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भनक भी नहीं हुई। यह कैसे हो सकता है भला?
कहीं न कहीं, कुछ तो था, जिसकी वजह से तीनों कर्मचारी इतना बड़ा जोखिम ले पाए। असल में, स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर भर्तियां होती रहती हैं। 300 बेड अस्पताल शुरू हुआ तो यहां भी संविदा पर स्टाफ रखा ही जाना था। इसीलिए कर्मचारियों को बेरोजगारों से वसूली का बहाना मिल गया। अब यह भर्ती अंदरखाने हो नहीं पाई या की नहीं गईं? यह भी पूरे प्रकरण में एक अहम सवाल है।
होता यह है कि बड़ी मछलियां बच जाती हैं और छोटी मछलियों का शिकार हो जाता है। अगर इस पूरे खेल की सही से जांच हो तो और भी तार जुड़ सकते हैं। वैसे, बेरोजगार तो हर जगह ही ठगा और छला जा रहा है। न जाने कितने ही बेरोजगार आर्थिक तंगी के चलते उधार लेकर इस आस में पैसे दे देते हैं कि नौकरी लगने के बाद चुका देंगे लेकिन नौकरी भी लगती नहीं और उधार और सिर चढ़ जाता है। भ्रष्टाचार ने लोगों की मानसिकता ही ऐसी बना दी है कि बिना लेनदेन कुछ नहीं होता।
ऐसे में, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा पारदर्शी सिस्टम विकसित करे, जिससे कि नौकरियों और खासतौर पर संविदा की नौकरियों में पूरी ईमानदारी से निष्पक्ष भर्ती की जा सके ताकि बेरोजगार ठगी का शिकार न होने पाएं, वहीं, नौकरी के नाम पर ठगी करने वालों पर ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि बाकी लोग उनसे सबक लेकर किसी बेरोजगार को अपना निशाना नहीं बना पाएं।
