जनसभाओं में भीड़
देश में 24 घंटे में 56,211 और लोगों को कोरोना से संक्रमित पाया गया। काेरोना के बढ़ते इन आंकड़ों को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल के दिनों में संक्रमण की बदतर होती स्थिति को लेकर आगाह भी कर दिया लेकिन जहां एक तरफ कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और …
देश में 24 घंटे में 56,211 और लोगों को कोरोना से संक्रमित पाया गया। काेरोना के बढ़ते इन आंकड़ों को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल के दिनों में संक्रमण की बदतर होती स्थिति को लेकर आगाह भी कर दिया लेकिन जहां एक तरफ कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और इसके चलते सारे लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए दो गज की दूरी-मास्क है जरूरी की बात सरकार से लेकर विशेषज्ञ तक सभी कर रहे हैं।
सबको कोरोना से बचाव के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है लेकिन ऐसे में यह बात डर के साथ ही बेहद चौंकाने वाली है कि पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, उनमें लगातार हो रहीं राजनीतिक गतिविधियों में खूब भीड़ उमड़ रही है। बेरोकटोक लोग जनसभाओं में शामिल हो रहे हैं।
चुनाव प्रचार में खूब भीड़ जुट रही है। आखिर क्यों? क्या चुनावी सभाओं में जुटने वाली भीड़ को कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता? केंद्र सरकार ने ही कोरोना से बचाव के लिए पूरे देश में गाइडलाइन लागू की है लेकिन इसका खुला उल्लंघन देखकर भी अफसर चुप हैं तो ताज्जुब होता है। क्या इससे यह नहीं लगता कि इन पांचों राज्यों में चुनाव बाद कोरोना का विस्फोट हुआ तो यह चौंकाने वाला नहीं होगा।
सिर्फ विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों में ही नहीं, उत्तर प्रदेश में भी भीड़ जुटने से रोकने को लेकर कोई बंदोबस्त नहीं दिख रहे हैं। राज्य में पंचायत चुनाव होने हैं। इसके लिए भी राज्य निर्वाचन आयोग ने गाइड लाइन जारी कर दी है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के सारे उपाय अमल में लाए जाएं, लेकिन यह गाइड लाइन भी बेअसर दिखने लगी है। ऐसे में, कोरोना संक्रमण को रोकना क्या संभव हो पाएगा? जो दूसरी लहर उठी है, वह असर दिखाएगी ही। ऐसे में हालात फिर भयावह हो सकते सकते हैं। हमें यह नहीं भूलना चािहए कि पिछले साल इसी लापरवाही का खमियाजा पूरे देश ने भुगता था। भीड़ के रूप में प्रवासी मजदूरों को निकाले जाने के बाद कोरोना संक्रमण फैला कि हालात बेकाबू हो गए।
अलबत्ता, वैक्सीनेशन का काम लगातार किया जा रहा है। 45 से अधिक उम्र वालों को देश में वैक्सीन लगाई जा रही है लेकिन अगले कुछ महीनों में यह वैक्सीन सारे लोगों को लग जाए, यह संभव ही नहीं है। सवाल यह है कि जब सरकार कोई गाइड लाइन बनाती है तो उसका पालन क्यों नहीं कराया जाता? ऐसी गाइड लाइन का क्या औचित्य, जिसका पालन ही नहीं कराया जा रहा है? सरकार को चाहिए कि कोरोना गाइड लाइन का पालन सख्ती से कराया जाए।
