मानसिक स्वास्थ्य

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ऐसी बात कही है, जिस पर आम तौर पर हमारे देश में ध्यान नहीं दिया जाता। आईआईएम जम्मू में आनंदम: सेंटर फॉर हैप्पीनेस का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन करते हुए निशंक ने कहा कि आज विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। मानसिक …

केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ऐसी बात कही है, जिस पर आम तौर पर हमारे देश में ध्यान नहीं दिया जाता। आईआईएम जम्मू में आनंदम: सेंटर फॉर हैप्पीनेस का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन करते हुए निशंक ने कहा कि आज विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में लोगों को संवेदनशील बनाना और उन्हें इसे शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्व देने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने जीवन में खुशी का महत्व बताया कि खुश होकर काम करेंगे तभी बुद्धि का विकास होगा।

असल में, कोरोना काल में बड़ी आबादी के सामने समस्याएं खड़ी हुई हैं। इनसे जूझते हुए लोगों के मन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। जािहर है कि निराशा जब मन में घर कर जाती है ताे उसका दुष्प्रभाव शारीरिक भी पड़ता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ खुश रहने पर जोर देते हैं लेकिन यह खुशी आए कैसे? इसके लिए हमारे देश में ढांचागत सुविधाओं का शुरू से ही अभाव है। बहुत सारी निजी संस्थाएं ही अपने स्तर से लोगों को खुशी के लिए प्रेरित कर रही हैं लेकिन सरकारी स्तर पर ऐसा नहीं है। जबकि जरूरत इस बात कि है कि देश में शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने जैसा ही ढांचा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विकसित करने की आवश्यकता है।

मन से हारे हार है, मन से जीते जीते। यह कहावत यूं ही नहीं है। अगर हम मन से खुश हैं तो निराशा के किसी भी भंवर से खुद को उबरकर सारी चुनौतियों का सामना भलीभांति करने में सक्षम हो जाते हैं। कोरोना महामारी के काल में मानसिक स्वास्थ्य के लिए ढांचा बनाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। हालांकि इस ढांचे की जरूरत कोरोनाकाल से पहले भी थी और आगे भी इसकी जरूरत सदैव रहेगी, क्योंकि तमाम तरह की दुश्वारियों के चलते जीवन में बहुत सारे लोग मानसिक परेशानियों से दो-चार होते हैं।

इसके नतीजे आत्महत्या और अवसाद के रूप में भी सामने आते रहते हैं। ऐसे में, लोगों को इन परेशानियों से उबरने और खुश रहने के लिए प्रेरित किए जाने की आवश्यकता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए जो सुझाव दिया है, उसको आगे बढ़ाते हुए न सिर्फ सरकारी स्तर पर कार्य किए जाने चाहिए बल्कि निजी संस्थाओं को भी आगे आकर इसमें योगदान देना चाहिए। समाज में भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह जीवन के झंझावातों से उबरते हुए खुद को सकारात्मक और खुश बनाए रखने के लिए अपना मानसिक स्तर मजबूत बनाए।