बरेली: बाजार में आ रही हाईब्रिड लौकी और तोरई, बिगाड़ सकती है सेहत
समीर बिसारिया, बरेली। लौकी और तोरई का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। चिकित्सक इसे सुपाच्य बताते हुए पेट की बीमारी के मरीजों को भी इनका सेवन करने की सलाह देते हैं लेकिन इस समय बाजार में जो लौकी और तोरई आ रही है वह आपकी सेहत खराब कर सकती है। समय से …
समीर बिसारिया, बरेली। लौकी और तोरई का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। चिकित्सक इसे सुपाच्य बताते हुए पेट की बीमारी के मरीजों को भी इनका सेवन करने की सलाह देते हैं लेकिन इस समय बाजार में जो लौकी और तोरई आ रही है वह आपकी सेहत खराब कर सकती है।
समय से पूर्व तैयार की गई हाईब्रिड लौकी और तोरई मंडी और बाजारों में खुलेआम बेची जा रही है। इस पर किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं लगाई जा रही है। विभागीय अधिकारियों का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मुनाफे के चक्कर में लोगों की सेहत से खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
दरअसल, लौकी और तुरई की पैदावार का सही समय अप्रैल माह के अंत तक शुरू होगा लेकिन मुनाफाखोरी के चक्कर में पिछले काफी दिनों से भारी मात्रा में हाईब्रिड लौकी और तोरई की आपूर्ति की जा रही है। इस बार बारिश भी नहीं हुई और नहरें भी सूखी पड़ी हैं। ऐसे में तोरई और लौकी के फूलों को बचाना भी बड़ी चुनौती है। इसलिए तुरई और लौकी की पैदावार करने वाले लोग फूल झड़ने से बचाने के लिए रासायनिक दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं।
गर्मी शुरू होते ही दोनों सब्जियों की मांग भी बढ़ने लगी है। डेलापीर सब्जी मंडी में हाईब्रिड लौकी भरपूर मात्रा में सप्लाई की जा रही है। गंगा किनारे के गांव फतेहगंज पूर्वी, फतेहगंज पश्चिमी, फरीदपुर, रामगंगा किनारे के खादर, बदायूं, आंवला और अन्य कई इलाकों के साथ-साथ राजस्थान से भी हाईब्रिड लौकी व तोरई बड़ी मात्रा में यहां आ रही है। मंडी में करीब 10 टन लौकी प्रतिदिन बेची जा रही है।
बाजार में मिलने वाली तुरई की सप्लाई ज्यादातर राजस्थान से की जा रही है। हालांकि तोरई की खपत अभी इतनी नहीं है। मंडी में सस्ते भाव में खरीदने के बाद फुटकर बाजार में इसे महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देसी लौकी और तोरई अप्रैल माह के अंत तक बाजार में आनी शुरू होती है जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है।
शाम को लगती है मंडी में लौकी व तोरई की बोली
डेलापीर सब्जी मंडी में रोज शाम को दूर-दराज से किसान अपनी-अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं। इसके बाद किसानों द्वारा फसल का भाव बोला जाता है। ज्यादा मांग के आधार पर भाव तय किया जाता है।
बुधवार का भाव
लौकी- 3 से 5 रुपये प्रति किलो- थोक
10 से 20 रुपये प्रति किलो- फुटकर
तोरई- 40 रुपये प्रति किलो- थोक
50 से 60 रुपये प्रति किलो- फुटकर
हाईब्रिड सब्जियों के नुकसान
हाईब्रिड सब्जियों में ज्यादा मात्रा में रासायनिक खाद व दवाओं का उपयोग किया जाता है जिसकी वजह से फसल समय से पहले तैयार हो जाती है। इसमें पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। हानिकारक दवाओं और खाद की वजह से सब्जियों में जानलेवा रसायनों की मात्रा अधिक हो जाती है जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।
