फैसला वापस

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Edited By Amrit Vichar
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छोटी बचत योजनाओं में जमा किए जाने वाले धन पर ब्याज दरें घटाने के केंद्रीय वित्त मंत्रालय के निर्णय को किसी मायने में उचित नहीं कहा जा सकता, सिवाय इसके कि इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा। हालांकि केंद्र सरकार ने 24 घंटे से भी कम समय में अपने इस फैसले को वापस …

छोटी बचत योजनाओं में जमा किए जाने वाले धन पर ब्याज दरें घटाने के केंद्रीय वित्त मंत्रालय के निर्णय को किसी मायने में उचित नहीं कहा जा सकता, सिवाय इसके कि इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा। हालांकि केंद्र सरकार ने 24 घंटे से भी कम समय में अपने इस फैसले को वापस ले लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को सुबह-सुबह ट्वीट कर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा है कि यह आदेश गलती से जारी हो गया था।

छोटी बचत योजनाएं निम्न और मध्यम वर्ग के लिए आकर्षण का केंद्र हमेशा से रही हैं। आम आदमी जितना भी जैसे-तैसे बचा पाता है, उसको अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शादी-ब्याह और बीमारी आदि की आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटी बचत योजनाओं में इसलिए जमा कर देता रहा है ताकि वक्त जरूरत उसका पैसा काम आए और बदले में उसको कुछ ब्याज भी हािसल हो जाए। यही ब्याज आम आदमी को बचत और सरकार की बचत योजनाओं के प्रति आकर्षित करता रहा।

एक वक्त में सरकार की बचत योजनाएं आम आदमी को आर्थिक संबल प्रदान किया करती थीं। किसान विकास पत्र तो इसीिलए बेहद लोकप्रिय हुआ करता था, तब ब्याज दर भी ठीक थीं और डाकघर की इस योजना में पैसा जमा करने पर लोगों को एक निर्धारित अवधि में दोगुना धन हािसल हो जाता था। चूंिक इस योजना में बहुत सारे लोग धन जमा करने लगे तो धीरे-धीरे सरकार दोगुना धन की अवधि कम करती गई। राष्ट्रीय बचत पत्र में जमा धन पर भी साल-दर-साल ब्याज कम किया जाता रहा। अब तो किसान विकास पत्र और राष्ट्रीय बचत पत्र से लेकर सुकन्या समृद्धि योजना तथा पीपीएफ में भी वित्त मंत्रालय ने ब्याज दरों में कटौती कर दी है।

यह कदम निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक तौर पर झटका ही है। ऐसे में, बचत के धन को निवेश करने के लिए आम आदमी के सामने विकल्प नहीं रहेंगे। जािहर है कि अब बचत का धन अब आम आदमी के लिए मामूली ब्याज का ही माध्यम बनकर रह जाएगा। अब बैंक खातों में पैसा रखना भी लोगों के लिए कोई खास लाभ नहीं देता है, बल्कि बैंक खातों में पैसा जमा करने पर खाताधारक को सर्विस चार्ज से लेकर ऑनलाइन निकासी तक का शुल्क देना होता है।

केंद्र सरकार को चाहिए कि वह आम आदमी को बचत पर ब्याज की अपेक्षित दर बनाए रखे, क्योंकि यही बचत योजनाएं निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों के आर्थिक संबल का उपयुक्त जरिया समझी जाती हैं। इनसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों को बचत की धनराशि पर आय होती रहती है। सरकार को हर कदम आम आदमी के हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।