मुरादाबाद : टूटते घरों को बचाने का सहारा बना नारी उत्‍थान केंद्र, इस वर्ष आ चुके हैं 225 मामले

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मुरादाबाद, अमृत विचार। वक्त के साथ कमजोर हो रही रिश्तों की डोर को काफी हद तक नारी उत्थान केंद्र सहारा दे रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि डोर टूटने पर पति-पत्नी को अलगाव का दंश न झेलना पड़े। अलगाव के बाद पति-पत्नी के रास्ते तो जुदा हो जाते हैं। लेकिन, उनके बच्चों के …

मुरादाबाद, अमृत विचार। वक्त के साथ कमजोर हो रही रिश्तों की डोर को काफी हद तक नारी उत्थान केंद्र सहारा दे रहा है। प्रयास किए जा रहे हैं कि डोर टूटने पर पति-पत्नी को अलगाव का दंश न झेलना पड़े। अलगाव के बाद पति-पत्नी के रास्ते तो जुदा हो जाते हैं। लेकिन, उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। लिहाजा टूटते घरों को बचाने के लिए शासन की ओर से शुरू हुई पहल को केंद्र काफी बेहतर तरीके से आगे बढ़ा रहा है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि लाकडाउन के बाद भी वर्ष 2020 में करीब 2403 मामले आए। इस वर्ष भी तीन माह में 225 मामले सामने आ चुके हैं। केंद्र में कुछ मामले तो ऐसे आते हैं कि वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने वाले तो छोड़िए सालों से एक दूसरे के साथ रहने वाले पति-पत्नी भी एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाकर अलग रहने की जिद करने लगते हैं। कभी पत्नियां पति की नशे की आदत से तंग होने की शिकायत करती हैं तो कभी ससुरालियों के अधिक हस्तक्षेप से अलग रहने की। यहां पर पति-पत्नी की जिद् के आगे बच्चों के बेहतर भविष्य का हवाला देकर उनको साथ रहने के लिए राजी किया जाता है।

वर्ष 2008 में शुरू हुआ था नारी उत्थान केंद्र
टूटते घरों को बचाने के लिए वर्ष 2008 में प्रदेश सरकार ने परिवार परामर्श केंद्र खोलने के आदेश दिए थे। हालांकि बाद में इसका नाम नारी उत्थान केंद्र कर दिया गया। इसके पीछे शासन की मंशा थी कि पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों में सीधे रिपोर्ट दर्ज न की जाए, बल्कि उनके बीच की गलतफहमी या कड़वाहट को दूर कर साथ रहने के लिए राजी किया जाए। इसके लिए बाकायदा जिलावार टीम का गठन किया गया। इसमें पुलिसकर्मियों के अलावा समाजसेवी, वरिष्ठ व्यक्ति, राजनीति से संबंध रखने वाले, चिकित्सक व मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया गया था। शुरुआत में हर सप्ताह शनिवार को केंद्र में आने वाले मामलों की सुनवाई होती थी। बाद में अफसरों ने जनपदवार अपनी सुविधानुसार दिन तय कर दिया।

वर्ष 2020 में आए 2403 मामले
वर्ष 2020 का आधा वक्त तो लाकडाउन में चला गया। करीब तीन माह तक नारी उत्थान केंद्र पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान इक्का-दुक्का मामले तो आए। लेकिन, उनकी सुनवाई नहीं हुई। लाकडाउन के बाद पूरे वर्ष में 2403 मामले नारी उत्थान केंद्र में आए। उनमें से आपसी सुलह-समझौते के जरिए 2024 मामलों का निस्तारण कर दिया गया, जबकि कई बार काउंसलिंग के बाद भी समझौता न होने पर 154 मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए गए। 145 पुराने मामलों में अभी भी सुनवाई चल रही है। इस वर्ष भी तीन माह में 225 मामले सामने आ चुके हैं।

केस-1
प्रेम विवाह करने पर घर से निकाला
कुछ दिनों पहले नारी उत्थान केंद्र में एक मामला सामने आया था। उसमें युवती ने प्रेम विवाह किया तो मायके वालों ने उसे घर से निकाल दिया। काफी समय तक चंडीगढ़ में रहने के बाद दंपति वापस आ गए। इसके बाद वह मायके गई तो मायके वालों ने पति के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। इतना भड़काया कि वह पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंच गई। बाद में नारी उत्थान केंद्र में मामला पहुंचा तो काउंसलिंग में उसने पति के साथ जाने की बात कही।

केस-2
पति नशा छोड़े या संपत्ति बेटे के नाम करे
हाल में ही एक मामला आया, जिसमें महिला पति की नशे की लत के कारण साथ रहना नहीं चाहती थी। महानगर निवासी अंजू की 11 साल पहले पवन से शादी हुई थी। उसका 11 साल का बेटा है। पति कुछ काम नहीं करता है। इसके अलावा शराब का आदी है, जिस कारण संपत्ति बेच रहा है। महिला का कहना था कि पति या तो नशा छोड़े या फिर संपत्ति बेटे के नाम करे। दोनों को केंद्र पर बुलाकर समझाया गया। बच्चे के भविष्य का हवाला दिया गया, जिस पर पति बेटे के नाम संपत्ति करने को राजी हो गया। इसके बाद दोनों को घर भेज दिया गया।

नारी उत्थान केंद्र काउंसलर ऋतु नारंग ने कहा कि नारी उत्थान केंद्र में टूटते घरों को जोड़ने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अधिकतर मामले नशे से जुड़े सामने आ रहे हैं। प्रयास किया जाता है कि सुलह-समझौते के साथ ही नशे की आदत छोड़ने के लिए भी युवाओं को प्रेरित किया जाए।

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