मुरादाबाद: कोर्ट ने मानी पुलिस की गलती, आरोपियों को बरी करने के आदेश

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मुरादाबाद, अमृत विचार। युवती की हत्या में फंस चुके पिता-पुत्र के साथ उनके रिश्तेदार को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने जिस युवती की हत्या के आरोप में उन्हें जेल भेजा था, वह एक साल पहले पति के घर में जीवित मिली थी। इसका खुलासा होने के बाद अमरोहा पुलिस की जमकर किरकिरी …

मुरादाबाद, अमृत विचार। युवती की हत्या में फंस चुके पिता-पुत्र के साथ उनके रिश्तेदार को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने जिस युवती की हत्या के आरोप में उन्हें जेल भेजा था, वह एक साल पहले पति के घर में जीवित मिली थी। इसका खुलासा होने के बाद अमरोहा पुलिस की जमकर किरकिरी हुई थी। आरोपी बनाए गए पिता ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़ा करते हुए जिला जज की कोर्ट में रिट दाखिल कर दी थी। गवाही और साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने सभी को निर्दोष मानते हुए बरी करने के आदेश दिए हैं। साथ ही दोषी विवेचक व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पुलिस के आला अफसरों को आदेशित किया है।

अमरोहा जिले के आदमपुर थाना क्षेत्र का मामला
खुद की पीठ थपथपाने के बाद हुई पुलिस की किरकिरी का यह मामला अमरोहा जिले के आदमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मलकपुर का है। दो साल पहले गांव निवासी सुरेश की बेटी कमलेश अचानक घर से गायब हो गई थी। इस पर उसके भाई रूप किशोर ने गुमशुदगी दर्ज करवा दी थी। साथ ही थाना बछरायूं के ग्राम सुल्तानपुर निवासी होराम व अन्य पर बहला-फुसलाकर अपहरण करने का भी अंदेशा जताया था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। काफी तलाश करने के बाद भी कमलेश का सुराग नहीं लगा था।

दोबारा हुई विवेचना तो पिता-पुत्र को पुलिस ने ठहरा दिया कातिल
28 मई 2019 को मामले की विवेचना एसपी अमरोहा ने तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक कुमार शर्मा को सौंपी। उन्होंने विवेचना में बड़ा फेरबदल करते हुए कमलेश के पिता सुरेश, भाई रूप किशोर व रिश्तेदार देवेंद्र को दोषी ठहरा दिया। उनका कहना था कि चाल-चलन ठीक न होने के कारण तीनों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर शव को बोरे में भरकर नदी में फेंक दिया था। उन्होंने दावा किया था कि तीनों की निशानदेही पर उसके कपड़े व वारदात में प्रयुक्त किया गया तमंचा भी बरामद कर लिया है। आरोपियों को आनर किलिंग का दोषी ठहराते हुए कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था।

एक फोन ने करा दी गुडवर्क की किरकिरी
सात अगस्त 2020 को नरेश नाम के व्यक्ति ने आदमपुर थाने में तैनात निरीक्षक पंकज वर्मा को फोन किया। उसका कहना था कि जिस कमलेश की हत्या के आरोप में उसके पिता-पुत्र व रिश्तेदार को जेल भेजा गया है, वह जीवित है और मौजूदा समय में ग्राम परौरा में राकेश सैनी के घर पर मौजूद हैं। इस पर निरीक्षक पंकज वर्मा ने रहरा चौकी इंचार्ज अमित कुमार को राकेश के घर भेजा तो सूचना सही निकली। इस पर पुलिस ने कमलेश को कोर्ट में पेश करने के बाद नारी निकेतन भेज दिया। कमलेश ने बताया कि वह अपनी मर्जी से राकेश के साथ गई थी, जिसके बाद गाजियाबाद में एक मंदिर में शादी कर ली थी। उसने जानबूझकर किसी को भी अपने जिंदा होने या फिर शादी की सूचना नहीं दी।

सुरेश ने जिला जज की कोर्ट में दायर की रिट
कमलेश की गवाही के बाद सुरेश और रूप किशोर को जमानत मिली। इसके बाद सुरेश ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। करीब आठ महीने तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए। साथ ही तीनों आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर बाहर चले रहे सुरेश व रूप किशोर को अब जमानत की जरूरत नहीं हैं। जेल अफसरों को देवेंद्र को भी रिहा करने के आदेश दिए हैं। आदेश दिए हैं कि अगर तीनों किसी अन्य मामले में आरोपी नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा कर दिया जाए। वहीं दोषी विवेचक अशोक कुमार शर्मा व अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी व आईजी रेंज को निर्देशित किया है।

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