हल्द्वानी: जंगलों की आग से हुए वायु प्रदूषण का अध्ययन करेगा पीसीबी
अमृत विचार, हल्द्वानी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जंगलों की आग से होने वाले वायु प्रदूषण का तुलनात्मक अध्ययन करने का फैसला किया है। पीसीबी आज से 24 घंटे तक वायु प्रदूषण की माप करेगा। फिर इस डाटा का जंगल में आग लगने से पहले और लॉकडाउन अवधि से अध्ययन किया जाएगा। इस आधार पर वायु …
अमृत विचार, हल्द्वानी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जंगलों की आग से होने वाले वायु प्रदूषण का तुलनात्मक अध्ययन करने का फैसला किया है। पीसीबी आज से 24 घंटे तक वायु प्रदूषण की माप करेगा। फिर इस डाटा का जंगल में आग लगने से पहले और लॉकडाउन अवधि से अध्ययन किया जाएगा। इस आधार पर वायु प्रदूषण को न्यून करने के लिए योजना बनाई जाएगी। यह पहली बार होगा जब इस तरह का अध्ययन किया जाएगा।
पीसीबी अधिकारियों के अनुसार एयर क्वालिटी मशीन बेस अस्पताल में लगी हुई है। इस मशीन से हल्द्वानी में होने वाले वायु प्रदूषण की माप की जाती है। पिछले कुछ दिनों से जिले के पर्वतीय इलाकों और तराई के जंगलों में भीषण आग लगी हुई थी। इसकी वजह से आसमान में चारों तरफ धुंध ही धुंध छाई हुई थी। वायु में प्रदूषण बढ़ा है। जो पीसीबी के मानकों के विपरीत भी जाने की आशंका है। इसी के मद्देनजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जंगलों की आग से हुए वायु प्रदूषण की माप करने का फैसला किया है। पीसीबी मंगलवार को 24 घंटे तक वायु प्रदूषण का डाटा इकट्ठा करेगा। फिर इस डाटा का जंगलों में आग लगने से पहले के दिनों और लॉकडाउन की अवधि से इसका तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। यदि वायु प्रदूषण मानकों से ज्यादा निकलता है तो प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए योजना बनाई जाएगी।
क्या होता है एयर क्वालिटी इंडेक्स
वायु गुणवत्ता सूचकांक, यह दरअसल एक नंबर होता है जिसके जरिए हवा का गुणवत्ता पता लगाया जाता है। साथ इसके जरिए भविष्य में होने वाले प्रदूषण के स्तर का भी पता लगाया जाता है। इसी सूचकांक के आधार पर किसी भी क्षेत्र के वायु प्रदूषण को कम करने के लिए योजना तैयार की जाती है।
यह है एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मानक
एक्यूआई 0-50 – अच्छा
एक्यूआई 51-100 संतोषजनक
एक्यूआई 101-200 मध्यम
एक्यूआई 201-300 खराब
एक्यूआई 301-400 बेहद खराब
एक्यूआई 401-500 गंभीर
आज से 24 घंटे तक बेस अस्पताल में लगी एयर क्वालिटी मशीन से हवा के नमूने लेकर वायु प्रदूषण की जांच की जाएगी। फिर इस डाटा की पिछले डाटा से अध्ययन होगा ताकि पता चल सके कि जंगलों की आग से वायु पर कितना असर होता है।
- आरके चतुर्वेदी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हल्द्वानी
