हल्द्वानी: गरीबों के मुंह का निवाला छीनने से भी नहीं चूकते खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी

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अश्वनी श्रीवास्तव, हल्द्वानी। जिला खाद्य आपूर्ति कार्यालय में लंबे समय से कुण्डली मार कर बैठे अधिकारी और कर्मचारी गरीबों के मुंह का निवाला भी छीनने से नहीं चूक रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान जिले में प्रधानमंत्री अन्य योजना के तहत बीपीएल कार्ड धारकों को मुफ्त में राशन बांटे जाने की योजना में भी हाथ साफ …

अश्वनी श्रीवास्तव, हल्द्वानी। जिला खाद्य आपूर्ति कार्यालय में लंबे समय से कुण्डली मार कर बैठे अधिकारी और कर्मचारी गरीबों के मुंह का निवाला भी छीनने से नहीं चूक रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान जिले में प्रधानमंत्री अन्य योजना के तहत बीपीएल कार्ड धारकों को मुफ्त में राशन बांटे जाने की योजना में भी हाथ साफ करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई।

जिसके चलते हल्द्वानी शहर के एक राशन कोटेदार को 27 कुन्तल अधिक राशन का कोटा आवंटित कर दिया गया। शिकायत होने पर जब जांच के आदेश हुए तो जांच को रफा-दफा करने के लिए बढ़े हुए राशन कोटे का समायोजन कर इस बड़े घोटाले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

क्या कहते हैं नियम

सूत्रों के मुताबिक कोरोना काल में सरकारी सस्ता गल्लों की दुकानों में बीपीएल कार्डधारकों को मुफ्त में बांटे जाने के लिए प्रधानमंत्री अन्य योजना के तहत हल्द्वानी शहर के कोटेदारों को उनके कार्डधारकों के हिसाग से राशन का आवंटन जिला खाद्य आपूर्ति कार्यालय के द्वारा किया जाना था। लेकिन यहां के अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ के चलते हिम्मतपुर तल्ला स्थित रमेश चंद्र शर्मा की सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान पर 27 कुन्तल राशन निर्धारित कोटे से अधिक आवंटित कर दिया। जबकि इस दुकान के 284 कार्डधारक हैं, जिनके सदस्यों की कुल संख्या 1259 बताई जाती है।सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी परिवार के एक सदस्य को 5 किलो राशन सरकारी राशन की दुकानों से दिए जाने का नियम है। जिसके चलते इस राशन की दुकान को 6295 किलो राशन ही दिया जाना था।

कैसे बचाया गया चहेते को

लेकिन विभाग के अधिकारियों की खाऊ-कमाऊ नीति के चलते 6295 किलो राशन के अतिरिक्त 27 कुन्तल राशन का कोटा आवंटित कर दिया गया। इस मामले की शिकायत समाजिक कार्यकर्ता राकेश भट्ट ने जिलापूर्ति अधिकारी मनोज बर्मन से की। जिसके बाद उन्होंने इस मामले की जांच के आदेश जारी करते हुए इस मामले की जांच एआरओ गिरीश जोशी को सौंप दी। विभागीय जानकार बताते हैं कि पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने चूंकि इस घोटाले को अंजाम दिया था। इसलिए उसे बचाए जाने के लिए जांच अधिकारी जोशी ने इस पूरे प्रकरण को ही घूमा कर रख दिया और अपने चहेते निरीक्षक को घोटाले में फंसने से बचा लिया।

जांच को कैसे किया रफा-दफा
दरअसल इस जांच के बाद राशन विक्रेता रमेश चंद्र शर्मा की दुकान का निरीक्षण करने भी एआरओ दो बार गये। इस दौरान दुकानदार के रजिस्टर में दर्ज कार्डधारकों की संख्या और उसके सदस्यों की संख्या पर उन्होंने नजर डालने की जरुरत ही नहीं समझी। इस बाबत राशन विक्रेता रमेश ने कहा जो भी बात करनी हो आप अधिकारियों से बात कीजिए। बताया जाता है कि इस द्याोटाले में निरीक्षक रवि सन्याल की गर्दन नपते देख उसे बचाए जाने के लिए एआरओ ने कोटेदार को आवंटित किए गए राशन को बाद में कोटेदार के राशन में समायोजित कर इस जांच को रफा-दफा कर दिया।

गौरतलब है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि मुफ्त में बांटे जाने वाले राशन के कोटे का समायोजन किया जाए। चूंकि ये योजना कोरोना महामारी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा चलाई गई थी। इसलिए उसके कोटे का आवंटन अतिरिक्त किसी भी कोटेदार को नहीं किया जा सकता था। फिलहाल इस मामले को लेकर जिला खाद्य आपूर्तिअधिकारी (डीएसओ) मनोज बर्मन ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच के आदेश दिए थे, लेकिन बाद में कोटेदार से राशन की रिकबरी कर ली गई।

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