आर्थिक मोर्चे पर राहत
अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने इस वर्ष भारत की आर्थिक वृद्धि दर 12.5 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। वृद्धि दर चीन के मुकाबले भी अधिक होगी। हालांकि, चीन एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है, जिसकी वृद्धि दर 2020 में महामारी के दौरान भी सकारात्मक रही। इससे पहले, अर्थव्यवस्था के लिहाज से वर्ष 2020 सबसे बुरा साल …
अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने इस वर्ष भारत की आर्थिक वृद्धि दर 12.5 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। वृद्धि दर चीन के मुकाबले भी अधिक होगी। हालांकि, चीन एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है, जिसकी वृद्धि दर 2020 में महामारी के दौरान भी सकारात्मक रही। इससे पहले, अर्थव्यवस्था के लिहाज से वर्ष 2020 सबसे बुरा साल रहा। पिछले साल भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
मूडीज का भी कहना है बीते साल की गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की भविष्य की संभावनाएं अधिक अनुकूल हो गई हैं। साथ ही विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कहा कि वैश्विक वृद्धि अधिक तेजी से होगी, जिसकी अगुवाई अमेरिका, चीन और भारत करेंगे। बता दें साल 2020 भारत समेत पूरी दुनिया के देशों लिए कई बड़ी परेशानियों को लेकर आया था, जिसमें सबसे बड़ी परेशानी थी, कोरोना वायरस। कोरोना महामारी की वजह से पूरे विश्व के साथ भारत में भी विकास की रफ्तार थम सी गई और देश की जीडीपी शून्य से नीचे पहुंच गई थी। इन हालात को देख कर कोई भी अर्थशास्त्री यह नहीं बता सकता था कि देश की जीडीपी फिर कब तक बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी।
2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड आठ फीसदी की गिरावट आई लेकिन इस साल वृद्धि दर 12.5 फीसदी रहने का अनुमान है जो काफी बेहतर है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का दावा है कि हमारी अर्थव्यवस्था वास्तविक अर्थों में 2021-22 में दस फीसदी की दर से आगे बढ़ेगी। उन्होंने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में विकास दर के सकारात्मक रहने का अनुमान जताया है।
उम्मीद है कि अगले साल के आखिर तक देश की अर्थव्यवस्था प्री-कोविड स्थिति में पहुंच जाएगी। पाबंदियों में राहत के बाद देश-विदेश की मांग सुधरी है। इसके चलते बीते कुछ महीनों में मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन बढ़ा है। सरकार ने इस समय का इस्तेमाल कई संरचनात्मक सुधारों के लिए किया है और अभी कई सुधार पाइपलाइन में हैं। इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था ने कामकाज के नए चलन को स्वीकार कर लिया है। महामारी अभी खत्म नहीं हुई है और संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मांग और आपूर्ति को लक्षित ढांचागत सुधारों को पेश किया गया। अनिश्चितता की स्थिति में नीति बनाने का पूरा ध्यान नुकसान को कम से कम करने पर रहा। अब जब अर्थव्यवस्था में बढ़त के संकेत मिल रहे हैं तो हमें संक्रमण की दूसरी लहर से भी बचना है। इसके लिए सकारात्मक विकास दर के लिए नीति निर्माण व रणनीति तैयार करनी होगी।
