बरेली: आजादी पाना ही काफी नहीं, उसको संभाल कर रखना जरूरी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एक समिति का गठन किया है। इस समिति में डा. आशुतोष प्रिय, डा. रूचि द्विवेदी, डा. यतेंद्र, डा. अनु महाजन और डा. कीर्ति प्रजापति को सदस्य बनाया गया है। प्रो आशा चौबे के संयोजन में इस समिति ने 16-हफ़्तों का एक कैलेंडर …

बरेली, अमृत विचार। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एक समिति का गठन किया है। इस समिति में डा. आशुतोष प्रिय, डा. रूचि द्विवेदी, डा. यतेंद्र, डा. अनु महाजन और डा. कीर्ति प्रजापति को सदस्य बनाया गया है। प्रो आशा चौबे के संयोजन में इस समिति ने 16-हफ़्तों का एक कैलेंडर जारी कर दिया है।

प्रो चौबे ने बताया की इस क्रम में काव्य प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, लेक्चर सीरीज, स्लोगन प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, फ़्लैश मोब आदि विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होगा। आगे का कैलेंडर बाद में जारी किया जाएगा। कोरोना के चलते कार्यक्रम ऑनलाइन होंगे और आगे की स्थिति के आधार पर ऑफलाइन भी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

रविवार को इस “आज़ादी का अमृत महोत्सव: आवश्यकता एवं प्रासंगिकता” शीर्षक से एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता और संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के. पी. सिंह थे। इसके अलावा डा. आशुतोष डा. यतेंद्र, डा. अनु महाजन, एवं डा. कीर्ति प्रजापति, डा. आनंद, डा. जीतेन्द्र, एवं डा. प्रभा शर्मा, डा. अमित सिंह, डा. नलिनी श्रीवास्तव, डा. निवेदिता श्रीवास्तव, हर्षित मोहन, डा. अशोक कुमार, डा. पवन सिंह अदि शिक्षकों के अलावा अन्य शिक्षकों व छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. रूचि द्विवेदी ने कहा कि भारत को गुलामी की बेड़ियों से आजाद करने में मां भारती के अनेक सपूतों ने अपने प्राण निछावर किए ।

डा. अनु महाजन ने कहा देश के इतिहास का गौरव तभी कायम रहता है जब वह अपनी परंपराओं से प्रेरणा लेता है। प्रो. आशा चौबे ने कहा कि आज़ादी इतनी आसानी से नहीं मिली, इसको संभालना भी आसान नहीं है। डा. यतेंद्र ने कहा कि एक पक्षी भी पिंजरे में घुटन महसूस करता है, तो मनुष्यों की तो बात ही क्या। आज़ादी पाना ही काफी नहीं, उसको सभाल कर रखना भी बहुत ज़रूरी है। डा. आशुतोष प्रिय ने कहा कि यह आवश्यक है कि देश की वर्तमान पीढ़ी उन तमाम सपूतों को जाने जिनके बलिदान के कारण हम लोग आज़ादी से सांस ले रहे हैं।

डा. कीर्ति प्रजापति ने मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उद्धरण देते हुए कहा कि देश प्रेम को जान जान में फैलाने के लिए अमृत महोत्सव की परिकल्पना की गई है। आज़ादी हमारा अधिकार ही नहीं जिम्मेदारी भी है। युवा वर्ग को यह समझना जरूरी है।

संबंधित समाचार