चैत्र नवरात्र कल से, जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

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बरेली,अमृत विचार। कल(मंगलवार) से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। उत्तर भारत में नौ दिनों तक देवी मां के अलग-अलग स्‍वरूपों की पूजा की जाती है। मंगलवार को पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। भक्‍त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्‍प लेते हैं। पहले दिन कलश स्‍थापना व अखंड ज्‍योति प्रज्ज्वलित …

बरेली,अमृत विचार। कल(मंगलवार) से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। उत्तर भारत में नौ दिनों तक देवी मां के अलग-अलग स्‍वरूपों की पूजा की जाती है। मंगलवार को पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। भक्‍त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्‍प लेते हैं। पहले दिन कलश स्‍थापना व अखंड ज्‍योति प्रज्ज्वलित की जाएगी। फिर अष्‍टमी या नवमी के दिन कुंवारी कन्‍याओं को भोजन कराया जाएगा।

चैत्र नवरात्र के आखिरी दिन यानी नवमी को ‘राम नवमी’ कहते हैं। नवरात्रि में मंदिरों में मां के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रहती है। शहरभर के मंदिरों को सजाया गया है, तो वहीं बाजारों में पूजन सामग्री और उपवास का सामान लेने वालों की भीड़ रही।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य सुनील शास्त्री ने बताया कि घट स्थापना के लिए प्रात: काल का समय शुभ माना जाता है। प्रात: 5.58 से 9 बजे तक जो लोग कलश स्थापन न कर सकें उनके लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.36 बजे से 12.25 बजे तक शुभ रहेगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 13 मार्च को दिन में 3.51 बजे तक रहेगी, इस समय तक कलश स्थापना जरूर कर लें।

घटस्थापना में आवश्यक सामग्री
चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन कलश, सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), पवित्र स्थान की मिट्टी, गंगाजल, कलावा/मौली, अशोक के पत्ते, छिलके/जटा वाला नारियल, सुपारी, अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला, लाल कपड़ा, मिठाई, सिंदूर, दूर्वा आदि सामग्री की आवश्यकता होती है।

पहले दिन मां शैलपुत्री की होगी आराधना
नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश पूजा के साथ ही मां दुर्गा के पहले स्वरूप ‘शैलपुत्री ‘ का पूजन किया जाता है। इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहां से योगसाधना आरम्भ होती है। मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। मन विचलित रहता हो और आत्मबल में कमी हो तो शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता है।

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