फिर बिगड़ते हालात
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना महामारी लंबे समय तक रहेगी। चूंकि महामारी समाप्त होने में लंबा समय लगेगा इसलिए अपना ख्याल स्वयं ही रखें। लोगों को कोरोना वायरस का टीका लगाया जा रहा है, लेकिन संक्रमण से बचाने के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। भारत में …
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना महामारी लंबे समय तक रहेगी। चूंकि महामारी समाप्त होने में लंबा समय लगेगा इसलिए अपना ख्याल स्वयं ही रखें। लोगों को कोरोना वायरस का टीका लगाया जा रहा है, लेकिन संक्रमण से बचाने के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। भारत में कोरोना मौत का ताण्डव कर रहा है और स्वास्थ्य सेवाएं करीब-करीब धराशायी हो गई हैं।
महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दिल्ली समेत कई राज्य वैक्सीन के लिए तरस रहे हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में 1.84 लाख नए मामले दर्ज किए गए। विभिन्न शहरों से मिल रही खबरें चौंकाने वाली हैं। कहा जा रहा है कि महामारी एक साल पुरानी हो गई है लेकिन हमारे इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
संक्रमण की भयावहता का आलम है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी संक्रमित हो गए। कहा जा सकता है कि तेजी से बिगड़े हालात के लिए चुनाव प्रमुख कारक रहा है। चुनाव में लोगों की आवाजाही संक्रमण का मुख्य वाहक बनी। तभी तो मोहनलाल गंज से भाजपा के सांसद कौशल किशोर ने प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनाव पर रोक लगाने की मांग कर डाली।
उधर, महामारी की रफ्तार बढ़ने की वजह से कई राज्यों में लोग शहरों से पलायन कर अपने-अपने घर लौटने का मन बना रहे हैं या लौट रहे हैं। पलायन कर रहे श्रमिकों और कामगारों को रोककर उनके रहने, खाने की मुफ्त व्यवस्था और नि:शुल्क टीका लगवाने की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थितियां और खराब हो सकती हैं। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में पूर्ण लाकडाउन से साफ इन्कार किया है। उनका कहना है कि जीवन को भी बचाना है और उनकी जीविका को भी बचाना है।
सही बात है, लेकिन देश फिर से पूर्ण लाकडाउन की ओर बढ़ा तो हाशिये के लोगों का क्या हाल होगा। शासन-प्रशासन को लापरवाह, असमन्वित व गैरजिम्मेदार रवैये से बचकर एक सुचितित कार्य योजना के साथ आगे बढ़ना होगा, जिसमें वायरस की प्रभावी रोकथाम और उसके आर्थिक प्रभाव को न्यूनतम करने पर जोर हो।
इस बीच सीबीएसई की दसवीं की परीक्षाओं को रद और 4 मई से प्रस्तावित बारहवीं की परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है। परीक्षाओं को लेकर छात्रों व अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। कई राज्यों के मुख्यमंत्री व कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई नेता परीक्षाओं को रद करने की मांग कर रहे थे। नि:संदेह बोर्ड परीक्षाएं टालना सरकार का सराहनीय फैसला है। फिर भी यह फैसला पहले होना चाहिए था।
