दूर होगा संकट
देश में प्रतिदिन दो लाख से अधिक नए संक्रमितों का सामने आना महामारी की गंभीरता को दर्शा रहा है। ऐसे में देश में कोरोना वायरस के विदेशी टीकों को स्वीकृति देना और उनके लिए आयात का बाजार खोलना अच्छा निर्णय है। केंद्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी वैक्सीन निर्माता अपने उत्पादों को व्यावसायिक …
देश में प्रतिदिन दो लाख से अधिक नए संक्रमितों का सामने आना महामारी की गंभीरता को दर्शा रहा है। ऐसे में देश में कोरोना वायरस के विदेशी टीकों को स्वीकृति देना और उनके लिए आयात का बाजार खोलना अच्छा निर्णय है। केंद्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी वैक्सीन निर्माता अपने उत्पादों को व्यावसायिक रूप से जल्द से जल्द देश में उपलब्ध कराने के लिए उत्साहित रहें।
फाइज़र, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन सरीखी विदेशी कंपनियों ने भारत में मानवीय परीक्षण किए अथवा नहीं अब यह सवाल गौण है, क्योंकि बढ़ते संक्रमण पर रोक लगाना सरकार की प्राथमिकता है। ये टीके कई देशों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और विज्ञान पत्रिका ‘द लैंसेट’ ने इन टीकों का सकारात्मक विश्लेषण किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और जापान ने इन्हें आपात मंजूरी दी हुई है। हमारे कोविड-19 के राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह ने फाइज़र और मॉडर्ना से अतिरिक्त डाटा की मांग की थी, लेकिन वे अमरीका की फूड एंड ड्रग्स अथॉरिटी की स्वीकृति के आधार पर ही देश के बाजार में प्रवेश चाहती थीं। ऐसा नहीं हो सका, तो फाइज़र ने बीती फरवरी में अपना आवेदन वापस ले लिया था। तब कोरोना का संक्रमण भारत में इतना नहीं फैला था कि उसे ‘नई लहर’ का नाम दिया जा सके।
अब अप्रत्याशित रूप से कोरोना का खतरनाक रुप सामने है। लिहाजा उसी संदर्भ में टीकों की स्वीकृति को देखा जाना चाहिए। अभी भारत की ही कुछ कंपनियों के टीके पाइपलाइन में हैं। आने वाले कुछ महीनों में उन टीकों को भी मंजूरी मिल सकेगी, लिहाजा टीकाकरण का संकट दूर हो सकेगा।
इस दौरान रूस के स्पूतनिक-वी टीके को हरी झंडी देना भी बहुत बड़ा फैसला था, क्योंकि रूसी कंपनी ने भारत में डा. रेड्डी लैब के साथ मिलकर टीके के मानव परीक्षण किए थे। उसका डाटा भी ‘लैंसेट’ में प्रकाशित हुआ है। स्पूतनिक-वी की उपलब्धता भी देश में आसान होगी, क्योंकि कुछ और कंपनियों के सहयोग से टीके की 85 करोड़ खुराक सालाना के उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
इससे पहले सरकार को मूल्य निर्धारण और अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर मंथन करना होगा। स्पुतनिक, रूसी टीका, मई में उपलब्ध होने की संभावना है। इसके लिए भारत को महामारी प्रबंधन के बुनियादी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इसमें परीक्षण और अनुरेखण तंत्रों को बढ़ाना और संबंधित चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। तय है कि यह व्यवस्था होने से हमारे टीकाकरण अभियान की गति अवरुद्ध नहीं होगी। क्योंकि हम इस अंधेरे समय में आत्मसंतुष्ट होने का जोखिम नहीं उठा सकते।
