लापरवाही शर्मनाक
देश इस समय एक भयंकर दौर से गुजर रहा है। महामारी न केवल आम लोगों बल्कि हमारे चिकित्सातंत्र की भी परीक्षा है। आक्सीजन संकट के चलते दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पिछले 24 घंटे में 25 कोविड मरीजों की मौत हो गई। महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार में एक निजी अस्पताल की आईसीयू …
देश इस समय एक भयंकर दौर से गुजर रहा है। महामारी न केवल आम लोगों बल्कि हमारे चिकित्सातंत्र की भी परीक्षा है। आक्सीजन संकट के चलते दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पिछले 24 घंटे में 25 कोविड मरीजों की मौत हो गई। महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार में एक निजी अस्पताल की आईसीयू में आग लगने से कोविड-19 से पीड़ित 13 मरीजों की मौत हो गई। जीवन बचाने की उम्मीद में अस्पताल में भर्ती मरीजों को लापरवाही के चलते मौत बांटना शर्मनाक ही कहा जाएगा।
सवाल है कि इतने गंभीर रोगियों की देखरेख में ऐसी लापरवाही क्यों हुई। हादसा चाहे तकनीकी कारणों से हो या मानवीय चूक से, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस समय अस्पतालों पर महामारी के चलते भारी दबाव है। आखिर इन मरीजों की मौत की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जाती? क्यों ऐसे संवेदनशील मरीजों के उपचार वाले अस्पतालों में सुरक्षा के उच्च मानकों का पालन नहीं किया जाता। क्यों हम दुर्घटनाओं से रहित चिकित्सा व्यवस्था नहीं दे पाते।
वैसे देश के डॉक्टर व चिकित्साकर्मी अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को बचाने में लगे हैं, लेकिन प्रबंधतंत्र को ऐसे हादसों को टालने के गंभीर प्रयास करने चाहिए। तमाम देशों को वैक्सीन आपूर्ति करके हमने जो साख बनाई थी उस पर बट्टा लग रहा है। एक नागरिक के तौर पर कोरोना से बचाव के उपायों का पालन करने में तो हम असफल हुए हैं, मगर यह तंत्र की भी बड़ी विफलता है। जिस संवेदनशीलता के साथ इस दिशा में बचाव की रणनीति बनायी जानी चाहिए थी उसमें हम चूके हैं।
आकलन है कि जिस तरह कोरोना संक्रमण अप्रत्याशित तौर से फैल रहा है, उसके मद्देनजर अस्पतालों में 8-10 गुना ऑक्सीजन का इस्तेमाल बढ़ गया है, लिहाजा अस्पताल प्रबंधन हर वक्त तनाव और दबाव की मनःस्थिति में रहता है। ऑक्सीजन कुछ ही घंटों की शेष रह जाती है, तब तक प्राण-वायु की आपूर्ति नहीं हो पाती, लिहाजा हर पल उखड़ती सांसों की आशंका और नाजुकता भी बनी रहती है।
ऑक्सीजन की आपूर्ति में व्यवस्थागत खामियां तो हैं। अगर टाटा अपने स्टील प्लांट के उपयोग की ऑक्सीजन को मेडिकल इस्तेमाल के लिए मोड़ सकते हैं, तो अन्य क्यों नहीं कर सकते? चेतावनी मिल रही हैं कि अभी तो संक्रमण बढ़ेगा, लिहाजा वेंटिलेटर की जरूरत बढ़ेगी। उनकी कमी हो सकती है, लिहाजा अभी से केंद्रीय कमान बनाई जाए और सभी अनिवार्य सेवाओं को उसके तहत रखा जाए। अभी तो इंजेक्शन, ऑक्सीजन सिलेंडर और कोरोना टीके ही चोरी किए जा रहे हैं, पीक वाली स्थिति में अराजकता किसी भी हद तक पहुंच सकती है। कोरोना के बावजूद बौने स्वार्थ और क्षुद्र राजनीति जारी है।
