हल्द्वानी: जेल में केदियों पर मंडरा रहा है संक्रमण का खतरा
हल्द्वानी, अमृत विचार। कोरोना के बढ़ते केसों को लेकर अभी तक जेल आने वाले कैदियों के लिए कोई अस्थाई जेल नहीं बनाई गई है। जिसके चलते क्षमाता से तीन गुना से अधिक कैदियों का भार झेल रहे हल्द्वानी उपकारागार में कोरोना संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि कैदियों को आरटीपीसीआर टेस्ट कराकर जेल भेज …
हल्द्वानी, अमृत विचार। कोरोना के बढ़ते केसों को लेकर अभी तक जेल आने वाले कैदियों के लिए कोई अस्थाई जेल नहीं बनाई गई है। जिसके चलते क्षमाता से तीन गुना से अधिक कैदियों का भार झेल रहे हल्द्वानी उपकारागार में कोरोना संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि कैदियों को आरटीपीसीआर टेस्ट कराकर जेल भेज जा रहा है। लेकिन रिपोर्ट तीन दिन के बाद आने की वजह से इस अवधि के दौरान कैदी को अन्य कैदियों के साथ रखा जा रहा है।
हल्द्वानी जेल में वर्तमान में 1670 कैदी रह रहे हैं। जबकि इस जेल की क्षमत मात्र 500 कैदियों को रखने की है। जेल में रोजाना पांच से लेकर 30 तक नए कैदी आते हैं। जेलर संजीव ह्यांकी ने बताया कि नए कैदियों को पुलिस एंटीजन और आरटीपीसीआर टेस्ट कराकर भेज रही है। एंटीजन टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट आने पर कैदी को जेल में भेज दिया जा रहा है।
जबकि ऐसे मामले लगातार आ रहे हैं। जिसमे लोंगो की एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है और तीन दिन बाद आ रही आरटीपीसीआर टेस्ट में रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ रही है। वहीं शनिवार को जो कैदी कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इसकी भी एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। तीन दिन बाद उसकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वहीं पिछले साल कोरोना संक्रमण काल शुरू होने पर नैनीताल जेल को आइसोलेशन जेल बनाया गया था। वहां के सभी पुराने कैदियों को हल्द्वानी जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। उस समय नैनीताल या ऊधम सिंह नगर की किसी भी न्यायालय से कैदी को जेल भेजा जाता था तो पहले उसे 14 दिन तक नैनीताल जेल में रखा जाता था। इस अवधि में उसकी तबियत पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही हल्द्वानी जेल भेजा जाता था। जेलर संजीव ह्यांकी ने बताया कि वह प्रशासन को पत्र लिखकर नैनीताल मुख्यालय के न्यायालयों से जेल भेजे जाने वाले नए कैदियों को नैनीताल जेल भेजने की मांग कर रहे हैं। जिससे हल्द्वानी जेल में कैदियों की संख्या न बढ़ सके। साथ ही कैदियों के स्वास्थ का भी ध्यान रखा जा सके।
