राष्ट्रीय संकट
उच्चतम न्यायालय ने कोरोना संक्रमण के मामलों में बेतहाशा वृद्धि को ‘राष्ट्रीय संकट’ बताया है। न्यायालय का कहना है वह ऐसी स्थिति में मूक दर्शक बना नहीं रह सकता। साथ ही कहा कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति तथा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं समेत अन्य मुद्दों पर ‘राष्ट्रीय योजना’ …
उच्चतम न्यायालय ने कोरोना संक्रमण के मामलों में बेतहाशा वृद्धि को ‘राष्ट्रीय संकट’ बताया है। न्यायालय का कहना है वह ऐसी स्थिति में मूक दर्शक बना नहीं रह सकता। साथ ही कहा कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति तथा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं समेत अन्य मुद्दों पर ‘राष्ट्रीय योजना’ चाहता है।
वास्तव में कोरोना संकट का समय चुनौती पूर्ण है। समन्वय और पारस्परिक सहयोग के साथ कार्य करते हुए चुनौती का सामना किया जा सकता है। भारत में कोविड-19 का वैसा ही संकट खड़ा हो गया है, जैसा दुनिया के दूसरे हिस्सों में पहले देखा जा चुका है। भारत जिस स्थिति का सामना कर रहा है, ब्रिटेन और यूरोपीयीय देशों के साथ भी ठीक ऐसी ही समस्या थी।
अलग-अलग देशों के समान अनुभव रहे हैं। एक ओर टीकाकरण चल रहा है तो दूसरी ओर दूसरी लहर भी आ रही है, लिहाजा पक्के तौर पर यह नहीं कह सकते कि टीकाकरण इसे रोक देगा। दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने बिना किसी टीके के दूसरी लहर का सामना किया और ऐहतियाती उपायों (मास्क और भौतिक दूरी) के दम पर मामलों की संख्या काबू में रखने में कामयाब रहे।
कोरोना की दूसरी लहर ने जो तबाही हमारे यहां मचाई है, वह पड़ोसी देशों पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार में नहीं मचाई है। इसका कारण क्या है? अगर हम स्वास्थ्य संसाधनों या तंत्र की कमी की बात करें तो इन सभी देशों के मुकाबले हमारे स्वास्थ्य संसाधन बेहतर हैं। फिर क्या काऱण है कि हम बीस लाख करोड़ के कोरोना पैकेज और पीएम केयर्स फ़ंड में अच्छा खासा धन होने के बावजूद पिछले एक साल में, इस महामारी से नहीं लड़ सके? या तो सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया या वह इस दूसरी लहर का पूर्वानुमान नहीं लगा पाई। यह तंत्र की विफलता है या तंत्र को चलाने वालों की अक्षमता है?
अब लगता है, सब कुछ निजीकरण कर देने के चक्कर में सरकार ने देश के सबसे महत्वपूर्ण लोक कल्याण के मुद्दे, शिक्षा और स्वास्थ्य को लगभग अनाथ छोड़ दिया है। भारत के हालात पर कई देशों में चिंता है। यहां के लोगों की मदद के लिए फ्रांस एकजुटता अभियान चला रहा है। अभियान के तहत फ्रांस ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र, वेंटीलेटर्स और अन्य चिकित्सा सामान भेजेगा। यूएसए इंडिया चैम्बर ऑफ कॉमर्स (यूएसएआईसी) ने कहा कि भारत को पश्चिमी देशों की ओर से तत्काल मदद की जरूरत है। अमेरिका की ओर से मदद में किसी भी तरह की देरी किए जाने से भारत का कोविड-19 आपातकाल एक वैश्विक स्वास्थ्य एवं आर्थिक संकट बन सकता है।
