टीकाकरण पर सियासत
कोरोना टीकाकरण को लेकर सियासत तेज है। कुछ राज्य सरकारें और राजनीतिक दल 1 मई से आरंभ होने वाले टीकाकरण के तीसरे चरण का विरोध कर रहे हैं। देश में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू हुआ था। तीसरे चरण के लिए 18 साल से अधिक आयु के सभी नागरिक टीका लगवाने के लिए आनलाइन …
कोरोना टीकाकरण को लेकर सियासत तेज है। कुछ राज्य सरकारें और राजनीतिक दल 1 मई से आरंभ होने वाले टीकाकरण के तीसरे चरण का विरोध कर रहे हैं। देश में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू हुआ था। तीसरे चरण के लिए 18 साल से अधिक आयु के सभी नागरिक टीका लगवाने के लिए आनलाइन पंजीकरण करा रहे हैं।
महामारी से लड़ने के लिए केंद्र की पांच सूत्री रणनीति के तौर पर जांच, संपर्क में आए लोगों का पता लगाने, इलाज करने और कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए उचित व्यवहार करने के साथ ही टीकाकरण भी अहम हिस्सा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलाय ने बुधवार को कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोविड-19 रोधी एक करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध हैं और अगले तीन दिनों में 57.70 लाख और टीके उन्हें मिलेंगे।
सभी पक्षों को एहसास है कि कोरोना के खिलाफ जंग में टीका ही अंतिम हथियार है। फिर इस पर भी भ्रम और अफवाह की स्थिति क्यों है? कहा जा कहा है कि टीकाकरण के दूसरे दौर में ही वैक्सीन को लेकर मारामारी मची है। कई राज्य अपने यहां वैक्सीन समाप्त हो जाने की बात कह रहे हैं। कई जगहों पर टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा। ऐसे में जब तीसरे चरण में वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ जाएगा तो क्या स्थिति रहेगी? वैक्सीन की कमी से कैसे निपटा जाएगा। वैक्सीन कंपनियां जरूरत को पूरा नहीं कर पा रही हैं। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि उनकी जरुरत को पूरा करने के लिए किसी भी कंपनी ने पत्र का जवाब नहीं दिया है।
सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटैक की कोवैक्सीन के दाम में बुनियादी विरोधाभास है। वैक्सीन के दाम अलग-अलग क्यों हैं। इस सवाल का जवाब न तो केद्र सरकार ने दिया है और न ही टीका कंपनियों ने। कोरोना का टीकाकरण अभियान भी उसी तरह ‘राष्ट्रीय’ है, जिस तरह सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता रहा है। उसके तहत भी 10-12 गंभीर बीमारियों के लिए देश भर में वयस्कों, बच्चों और महिलाओं को मुफ्त टीके लगाए जा रहे हैं।
तो अहम सवाल है कि सरकार ने कोरोना टीकाकरण को भी, सभी उम्र के नागरिकों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क क्यों नहीं किया? हालांकि सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण नि:शुल्क है। निजी अस्पतालों में कीमत क्या रहेगी, यह राज्य सरकारों पर छोड़ देना चाहिए। कंपनियों को बाध्य किया जाए कि वे राज्य सरकारों को भी केंद्रीय दाम पर ही टीका मुहैया कराएं। कोरोना राष्ट्रीय आपदा है, लिहाजा टीकाकरण देश का बुनियादी कार्यक्रम है, नतीजतन दो कीमतें हो ही नहीं सकती।
