हल्द्वानी: जिंदगी बचाने को ‘दानू’ जगा रहे प्लाजमा दान की अलख
प्रशांत पांडेय, हल्द्वानी। अस्पतालों से निकलती लाशें, तीमारदारों की चीख पुकार। लोगों की ऐसी दशा देख शैतान की आत्मा भी पिघल जाए, लेकिन कालाबाजारी करने वाले पिशाच हैं कि इनके कलेजे से संवेदनाएं ही मर चुकी हों। दवा कारोबारी दवाओं को महंगे रेट पर बेच कर दोगुने से भी ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। हाथों …
प्रशांत पांडेय, हल्द्वानी। अस्पतालों से निकलती लाशें, तीमारदारों की चीख पुकार। लोगों की ऐसी दशा देख शैतान की आत्मा भी पिघल जाए, लेकिन कालाबाजारी करने वाले पिशाच हैं कि इनके कलेजे से संवेदनाएं ही मर चुकी हों। दवा कारोबारी दवाओं को महंगे रेट पर बेच कर दोगुने से भी ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। हाथों की सफाई के लिए सेनेटाइजर के दाम भी आम रेटों से ज्यादा कर दिए गए हैं। कोरोना महामारी से आज नहीं तो कल जंग जीत जाएंगे। लेकिन ऐसे कालाबाजारी करने वाले मानव पिशाचों को क्या यह समय कभी क्षमा करेगा, दवाओं के अभाव में दम तोड़ चुके लोगों के परिजन माफ करेंगे, कभी नहीं…
दूसरी तरफ ऐसे भी योद्धा हैं, जिन्हें खुद से ज्यादा महामारी से जूझ रहे लोगों की परवाह है, जो कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद सोशल मीडिया और मैसेज के जरिए लोगों की हर संभव मदद को तैयार है। वंदे मातरम ग्रुप के अध्यक्ष शैलेंद्र दानू , जो ऐसे आपदा के समय में खुद कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। ऐसे हालात में भी वह कोरोना की जंग लड़ रहे मरीजों की लगातार मदद कर रहे हैं। दानु अपने ग्रुप के सदस्यों के साथ कोरोना मरीजों की मदद के लिए प्लाज्मा एकत्र कर मरीजों को उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे मरीज जल्द से जल्द स्वस्थ्य हो सकें। पिछली बार के प्रयास में इन्होंने 150 से ज्यादा मरीजों की मदद कर जांन बचाई थी। इस बार कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत से ही वह प्लाज्मा जुटाने में लगे हैं और अब तक 180 लोगों को प्लाज्मा दिलाकर मदद कर चुके हैं।
कोरोना से ठीक हो चुके लोग दान करें प्लाजमा
एक मई से 18 वर्ष से ज्यादा की आयु के लोगों का भी टीकाकरण शुरू हो जाएगा। इनका कहना है कि टीकाकरण के बाद 28 दिनों तक रक्त दान नहीं किया जा सकता। इसलिए टीकाकरण से पूर्व वह ज्यादा से ज्यादा लोगों से प्लाजमा दान करने की अपील करे रहे हैं। इससे पूव वह काफी समय से लोगों की मदद के लिए समय–समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन भी करवाते हैं।
