वैश्विक सहयोग
देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की मार ऐसी पड़ रही है कि हर कोई बेबस नजर आ रहा है। दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की लड़ाई में वैश्विक समुदाय सहयोग के लिए आगे आ रहा है। संक्रमण के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए अमेरिका, रूस, यूरोप, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूएई्, खाड़ी …
देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की मार ऐसी पड़ रही है कि हर कोई बेबस नजर आ रहा है। दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की लड़ाई में वैश्विक समुदाय सहयोग के लिए आगे आ रहा है। संक्रमण के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए अमेरिका, रूस, यूरोप, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूएई्, खाड़ी देशों, पड़ोसी देशों सहित 40 देशों ने सहयोग की पेशकश की है। अमेरिका से बड़ी मात्रा में चिकित्सीय आपूर्तियां आने वाली हैं। रूस से भी 20 टन चिकित्सा सामग्रियां आई हैं।
इसके अलावा दुनिया के कई देशों ने महामारी की स्थिति से निपटने में सहयोग के लिए चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति की घोषणा की है । पिछले 24 घंटों में एक दिन में 3645 लोगों की मौत हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (ड्ब्ल्यूएचओ) भारत में मोबाइल अस्पताल इकाइयों को स्थापित करने और प्रयोगशालाओं को सहायता प्रदान करने में मदद कर रहा है। देश में अब तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 1,83,76,524 हो गई है, जिनमें से 2,04,832 की जान जा चुकी है।
आने वाले दिनों में संक्रमित मामलों की संख्या में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे अस्पतालों पर मरीजों के इलाज का दबाव बढ़ेगा और मृत्यु दर में वृद्धि होगी। सक्रिय मामलों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ रही है। जो करीब तीन लाख 80 हजार प्रतिदिन पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य ढांचे पर भारी दबाव है और बड़े शहरों में भी लोगों का उपचार से वंचित रहना आम हो गया है। अस्पतालों और घरों में आक्सीजन की देश व्यापी कमी से लोगों की मौत हो रही है।
हताश परिवार सोशल मीडिया पर गुहार लगा रहे हैं। मई में प्रतिदिन पांच लाख नए मामलों की भविष्यवाणी की गई है। यदि ये अनुमान सही हैं तो देश में जीवन बचाने के लिए बड़े पैमाने पर अतर्राष्ट्रीय सहायता की जरुरत होगी। कोरोना संकट की इस बेला में पूरी दुनिया के देशों द्वारा भारत की मदद के लिए बढ़ाया गया हाथ एक अभिभूत करने वाला पल है। केंद्र सरकार को भी विदेश से सहायता का अनुरोध करने और स्वीकार करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
फ्रांस के राष्ट्रपति का कोरोना संकट की घड़ी में सदा मददगार रहने की बात कहना भी अहमियत रखता है। यह सब यूं ही नहीं है। भारत ने भी विपत्ति के समय अपने मित्र राष्ट्रों व अन्य देशों को हर संभव मदद पहुंचाने का कार्य किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र को तत्परता से काम करना चाहिए और भारत के हित में वैश्विक सहायता के लिए सभी प्रयास करने चाहिए।
