अविकसित तंत्र

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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कोरोना की पकड़ से छूटने के लिए लोग छटपटा रहे हैं। मंजर ऐसा है कि अपनों को बचाने के लिए लोग गिड़गिड़ा रहे हैं, सोशल मीडिया से लेकर सरकारी तंत्र के दरवाजे तक अपनी गुहार लगा रहे हैं। फिर भी मदद नहीं मिल रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि 70 साल में …

कोरोना की पकड़ से छूटने के लिए लोग छटपटा रहे हैं। मंजर ऐसा है कि अपनों को बचाने के लिए लोग गिड़गिड़ा रहे हैं, सोशल मीडिया से लेकर सरकारी तंत्र के दरवाजे तक अपनी गुहार लगा रहे हैं। फिर भी मदद नहीं मिल रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि 70 साल में स्वास्थ्य अवसंरचना की, जो विरासत मिली है, वह अपर्याप्त है और स्थिति खराब है।

स्वास्थ्य क्षेत्र चरमराने के कगार पर है। देश में संक्रमण के कारण अब तक दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। किसी भी देश के लिए इतनी बड़ी जनशक्ति का अवसान वाकई पीड़ादायक है। हालांकि सरकारी आंकड़ों को लेकर सवाल उठाने वाले स्वतंत्र पर्यवेक्षक संख्या को इससे ज्यादा बताते हैं। जो भी है, यह हमारे नीति-नियंताओं पर सवाल खड़ा करता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मृतकों में से 70 प्रतिशत से अधिक लोग किसी न किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। निस्संदेह, कोरोना से मरने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो पहले से ही कई घातक रोगों से जूझ रहे थे। लेकिन ऑक्सीजन की कमी से लोगों का मरना हमारी शर्मनाक विफलता को दर्शाता है।

बताता है कि हम ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित नहीं कर पाए हैं जो अनमोल जिंदगियां बचाने का काम कर सके। देश में स्वास्थ्य विषयक आंकड़े विकासशील देशों की सूची में शर्मसार करने वाले हैं। पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के अब तक के सर्वाधिक 3,86,452 नए मामले सामने आए हैं। साथ ही देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 31 लाख को पार कर गई है। लोगों के ठीक होने की दर गिरकर 81.99 प्रतिशत हो गई है।

इस हताशा व निराशा के बीच उम्मीद की किरण यह है कि हमने देश में स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन तैयार कर ली और कोविशील्ड का उत्पादन देश में कर रहे हैं। इस महामारी में यदि हमें विदेशी वैक्सीन पर निर्भर रहना पड़ता तो सवा अरब के देश के क्या हालात होते, अंदाजा लगाया जा सकता है। अब रूस की स्पूतनिक समेत कई अन्य वैक्सीनों के रास्ते भी खुले हैं। हम अब तक दुनियां में सबसे तेज गति से पंद्रह करोड़ वैक्सीन लगा चुके हैं।

दो चरणों का सफल टीकाकरण हो चुका है। देश में शनिवार से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण के तीसरे चरण के पहले को-विन डिजिटल मंच पर 2.45 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है। जाहिर है ऐसे में देश की दोनों वैक्सीन निर्माता कंपनियों को युद्धस्तर पर टीकों का उत्पादन करना होगा।