भविष्य की तैयारी

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Edited By Amrit Vichar
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आपदा के दौरान भी लाभ-हानि के गणित में मानवीय मूल्यों को कलंकित किया जा रहा है। मानवता शर्मसार हो रही है। आपदा को लाभ के अवसर में बदलने की कोशिश में लोगों का नैतिक पतन हो चुका है। कोराना की दूसरी लहर के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार बैठकें कर रहे हैं। रविवार को प्रधानमंत्री …

आपदा के दौरान भी लाभ-हानि के गणित में मानवीय मूल्यों को कलंकित किया जा रहा है। मानवता शर्मसार हो रही है। आपदा को लाभ के अवसर में बदलने की कोशिश में लोगों का नैतिक पतन हो चुका है। कोराना की दूसरी लहर के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार बैठकें कर रहे हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ऑक्सीजन और दवा की उपलब्धता की समीक्षा करने के लिए विशेषज्ञों के साथ एक बैठक की।

बैठक में कोविड ड्यूटी में शामिल होने के लिए मेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रमों के पास-आउट छात्रों को प्रोत्साहित करने का निर्णय भी लिया गया। कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा भी नित नए रिकार्ड छू रहा है। पिछले 24 घंटे में सर्वाधिक करीब चार लाख नए मामले सामने आए और इसके साथ ही देश में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 1,95,57,457 हो गए जबकि पिछले 24 घंटों में 3,689 लोगों की मौत हो गई। इस समय प्राणवायु आक्सीजन को लेकर देशभर में हाहाकार मचा है। कोविड-19 और भ्रष्टाचार की लहर साथ-साथ दौड़ रही है। एक तरफ जहां लोगों को कोरोना ने परेशान किया है।

वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी। अस्पतालों में ऑक्सीजन व वैक्सीन की कमी के चलते इन्हें मनचाहे दामों में बेचकर लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। जबकि जनता को इस महामारी को राष्ट्रीय खतरे के रूप में लेना चाहिए। टीकाकरण को और ज्यादा तेज गति से किया जाना चाहिए। सवाल ये है कि क्या इससे कोई सबक लिया जाएगा या फिर जैसी कि आशंका जताई जा रही है तीसरे हमले के समय भी हम ऐसे ही असहाय खड़े रहेंगे ?

इस भारी संकट के बीच लोग इंसानियत को बचाए रखने की भी मिसाल पेश कर रहे हैं। संभवतः यही कारण है कि एक तरफ जहां सिस्टम नाकाम नज़र आने लगता है, उसी सिस्टम के भीतर संभावनाओं की तलाश करते हुए सोशल मीडिया पर लोग सक्रिय होते हैं औऱ एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।

इस बात का उपयोग, आपसी सहयोग की उम्मीद कायम रखने के लिए किया जा सकता है। महामारी के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने अपना रुख बदल लिया है। हमें कोविड और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाना होगा। इसके लिए सरकार और जनता द्वारा सावधानी बरतने की जरूरत है। जिस तरीके के हालात हमारे सामने हैं उसमें यह बात काफी हद तक जरूरी है कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर हमें अपनी तैयारियां करनी चाहिए।