राष्ट्रीय लाकडाउन
देश में महामारी को मात देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह राहत की बात है। पिछले 24 घंटों में 3.20 लाख से अधिक मरीज कोरोना मुक्त हुए हैं। हालांकि इस दौरान साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। रोजाना बढ़ रहे संक्रमितों के आंकड़े चिंताजनक हैं। दुनिया के देश …
देश में महामारी को मात देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह राहत की बात है। पिछले 24 घंटों में 3.20 लाख से अधिक मरीज कोरोना मुक्त हुए हैं। हालांकि इस दौरान साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। रोजाना बढ़ रहे संक्रमितों के आंकड़े चिंताजनक हैं। दुनिया के देश इस लड़ाई में हरसंभव तरीके से मदद कर रहे हैं। इस कठिन दौर में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर बेड तक के लिए लोग जद्दोजहद कर रहे हैं।
कई राज्यों में लॉकडाउन लगाया जा रहा है। बिहार में बुधवार से 15 मई तक लॉकडाउन लगाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत के बाद देश में अब तक टीकों की खुराकें 15 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
अस्पतालों में बिस्तरों की गंभीर कमी है और अस्थायी व्यवस्थाओं में लोगों की देखभाल की जा रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सामान की कमी है। आक्सीजन संकट को दूर करने के लिए दूसरे राज्यों से भी आक्सीजन दिल्ली भेजी जा रही है। कोरोना उपचार में काम आने वाली दवाओं के वितरण में कोताही और कालाबाजारी का बोलबाला लोगों की मुसीबत बढ़ा रहा है। सवाल बना हुआ है कि क्यों मरीजों को दवा व ऑक्सीजन के लिये दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
इस बीच अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने सुझाव दिए कि भारत में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू किया जाना चाहिए और व्यापक स्तर पर लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जाए। साथ ही बड़ी संख्या में अस्थायी अस्पताल बनाए जाने चाहिए। उधर मंगलवार को राहुल गांधी ने भी कहा कि लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों को नियंत्रित करने और महामारी का प्रसार रोकने के लिए अब संपूर्ण लॉकडाउन ही एकमात्र उपाय रह गया है। ऐसी ही राय आईसीएमआर और एम्स के विशेषज्ञ भी सरकार को दे चुके हैं। केंद्र ने इस राय पर कोई फैसला नहीं लिया है।
इस बारे में फैसला करते समय सरकार को तय करना होगा कि लाकडाउन का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कम पड़े। जिन लोगों पर लाकडाउन का प्रभाव पड़ सकता है, उनके लिए खास इंतजाम किए जाएं। शासन व प्रशासन से परिपक्व व्यवहार की उम्मीद की जानी चाहिए। लोग तकलीफ में हैं, जिसे संवेदनशील ढंग से ही दूर किया जाना चाहिए। लोगों को विश्वास में लेने से समस्या का समाधान तलाशने में मदद मिलेगी। जनता व सरकार के सहयोग ही महामारी से निपटने का रास्ता निकलेगा।
