टीकाकरण की बाधाएं

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से पहले देश की अर्थव्यवस्था उबरना शुरू हो गई थी पर अब स्थिति बदल गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि आरबीआई कोविड-19 मामलों में फिर बढ़ोतरी से पैदा हुए हालात की लगातार निगरानी कर रहा है। सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा …

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से पहले देश की अर्थव्यवस्था उबरना शुरू हो गई थी पर अब स्थिति बदल गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि आरबीआई कोविड-19 मामलों में फिर बढ़ोतरी से पैदा हुए हालात की लगातार निगरानी कर रहा है। सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिर भी वायरस से लड़ने के लिए संसाधनों का उचित प्रबंधन करना होगा।

सही है कि कोरोना सिर्फ स्वास्थ्य आपदा नहीं है‚ यह आर्थिक आपदा भी है और उसका अर्थ के स्तर पर मुकाबला जरूरी है। यह समय बहुत ही विशिष्ट समय है। विशिष्ट समय में विशिष्ट उपायों की जरूरत होती है और केंद्र सरकार को त्वरित और व्यापक टीकाकरण की आर्थिक बाधाओं को तुरंत दूर करना चाहिए। देश में टीकाकरण की प्रक्रिया पहले ही विलंब से चल रही है। 18 से 44 वर्ष की उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू करने के बाद टीकाकरण की गति और धीमी हुई है। यह समय ज्यादा अगर मगर का नहीं है।

गौरतलब है कि देश में एक दिन में कोरोना से रिकॉर्ड 3,780 लोगों की मौत के बाद इस बीमारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ कर 2,26,188 हो गई है जबकि एक दिन में संक्रमण के 3,82,315 नये मामले सामने आए हैं। ऐसे में टीकाकरण की गति को तेज किया जाए।

अभी यह बहस चल रही है कि टीकाकरण का खर्च कौन करेगा‚ मुफ्त होना चाहिए या केंद्र को ही वहन कर लेना चाहिए या राज्यों को भी इसमें हिस्सेदारी निभानी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए। करीब 130 करोड़ के देश में अभी बीस करोड़ लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है। एक बड़ी बाधा वित्तीय बाधा है। राज्य सरकारों के पास संसाधनों का संकट है‚ यूं केंद्र के पास भी खुला खजाना नहीं है। पर केंद्र सरकार की संसाधन संग्रह क्षमता राज्य सरकारों के मुकाबले ज्यादा है।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार चाहे‚ तो वैक्सीन का पूरा खर्च उठा सकती है। उनका कहना है कि चालू वित्त वर्ष यानी 2021-2022 में विकास दर 10.5 फीसदी संभव है। ऐसी स्थिति में टीके पर खर्च को एक तरह से वित्तीय निवेश के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। टीका उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा। परंतु इसका जवाब सरकार नहीं दे सकी है कि टीकाकरण शुरू करने के पहले उत्पादन में इजाफा क्यों नहीं किया गया।

टीकाकरण बढ़ाने के लिए वितरण अथवा आपूर्ति की व्यवस्था को बेहतर करना होगा। सरकार को निजी क्षेत्र के साथ बेहतर साझेदारी करनी होगी। टीकों में निवेश और निवेशकों के साथ व्यवहार को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।